15 जुलाई 2025
यदि आप युवाओं के बीच में सेवकाई में सम्मिलित रहे हैं, तो आप जानते होंगे कि "धर्मसिद्धान्त के साथ संगोष्ठी" या "आज रात, ईश्वरविज्ञान पर चर्चा" जैसे विज्ञापन देकर भीड़ को आकर्षित करना सरल नहीं हो सकता है। आज के किशोरों और युवा वयस्कों को गहराई से ईश्वरविज्ञान सीखने के अनुशासन में सम्मिलित करना कठिन हो सकता है-विशेषकर इसलिए क्योंकि वे अधिकत्तर मनोरंजन और सोशल मीडिया की उस संस्कृति से प्रभावित होते हैं, जहाँ दो मिनट की क्लिप्स और संक्षिप्त सूचनाओं की भरमार है। यह संस्कृति गहरे और केंद्रित ईश्वरविज्ञानिय विचार के लिए की भूख को बाधित कर सकती है।
