Why-Should-I-Go-to-Church
मुझे कलीसिया क्यों जाना चाहिए?
14 अगस्त 2025
Is-It-OK-for-Christians-to-Grieve
क्या ख्रीष्टियों के लिए शोक करना उचित है?
21 अगस्त 2025
Why-Should-I-Go-to-Church
मुझे कलीसिया क्यों जाना चाहिए?
14 अगस्त 2025
Is-It-OK-for-Christians-to-Grieve
क्या ख्रीष्टियों के लिए शोक करना उचित है?
21 अगस्त 2025

मैं एक ईश्वरभक्त पिता कैसे बन सकता हूँ?

How-Can-I-Be-a-Godly-Dad

जोएल स्मिथ

हाल ही में क्रय किए गए लकड़ी के समान के साथ उसको जोड़ने के लिए एक निर्देश पुस्तिका आई थी, जिसमें चित्र सहित स्पष्ट किया गया कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। क्या नहीं करना चाहिए के विषय में लिखी गई बातें निस्सन्देह उन सामान्य त्रृटियों पर आधारित थीं जिन्हें उपभोगताओं ने सामना किया होगा। फिर भी, क्या न करें की बातें विशेष रूप से सहायक प्रमाणित हुईं, जिससे मुझे अत्यधिक निराश होने से बचाया है। इसी प्रकार अपने वचन के माध्यम से, परमेश्वर पिताओं को निर्देश प्रदान करता है जो हमें आत्मा-विदारक त्रृटियों से बचा सकते हैं, ऐसी त्रृटियाँ जो हमारे पतन का कारण बन सकती हैं, साथ ही हमारे बच्चों के पतन का कारण भी बन सकती हैं।

वचन परमेश्वरीय निर्देशों से भरे हुए हैं कि पिताओं के रूप में हमें क्या करना चाहिए और साथ ही क्या नहीं करना चाहिए, जैसा कि प्रेरित पौलुस के दोहरे निर्देश से प्रदर्शित होता है, “पिताओं, अपने बच्चों को क्रोध न दिलाओ, वरन् प्रभु की शिक्षा और अनुशासन में उनका पालन-पोषण करो” (इफिसियों 6:4)। निर्देश के साथ-साथ, पवित्रशास्त्र पिता होने के बहुत सारे सकारात्मक और नकारात्मक उदाहरण प्रदान करते हैं। नकारात्मक उदाहरण विशेष रूप से हृदयस्पर्शी प्रतीत होते हैं, विशेषकर जब हम ऐसे कई ईश्वरभक्त पुरुषों के विषय में पढ़ते हैं जिनके बच्चों ने अपने पिता के मार्ग का अनुसरण नहीं किया या उनका बड़ा पतन हुआ। इन उदाहरणों की संख्या यह दर्शाता है कि पिताओं के लिए यह ध्यान देने योग्य एक नमूना है। किसी बच्चे में प्रचलित और हानिकारक पाप, सम्भवतः यदि पिता द्वारा सम्बोधित किया गया होता, तो इसका अन्त उस प्रकार से नहीं होता जैसा कि हुआ।

पुराने नियम की यह कहानियाँ परमेश्वर द्वारा माता-पिता को निर्देश देने से कहीं अधिक बढ़कर है, परन्तु साथ ही वह इनसे कम भी नहीं हैं। इसलिए, वह हमें यह शिक्षा देने के लिए चेतावनियाँ और अवसर दोनों प्रदान करते हैं कि हम अपने बच्चों को  (और स्वयं को) ईश्वरभक्ति की ओर कैसे ले जाएँ। नहीं, हम अपने बच्चों के उद्धारकर्ता तो नहीं बन सकते हैं। परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से, हम उनके पिता के रूप में सक्रिय रीति से उनका यीशु ख्रीष्ट की ओर मार्गदर्शन कर सकते हैं, जो न केवल हमारे द्वारा किए गए पापों को करने से बचाता है, परन्तु उन बड़े पापों और परिणामों से भी बचाता है जिन्हें रोका जा सकता है। आइए उत्पत्ति की पुस्तक के कई परिदृश्यों को देखें।

आदम: कैन का क्रोध

उत्पत्ति 3 में आदम और हव्वा के पाप को पहले परिवार के मध्य अपना प्रभाव दिखाने में देर नहीं लगी। उनके बेटे कैन और हाबिल का परिचय हुआ ही था कि हम पारिवारिक संघर्ष को देखते हैं। कैन इस बात से क्रोधित था कि परमेश्वर ने उसकी भेंट की तुलना में उसके भाई की भेंट को स्वीकार किया। यद्यपि परमेश्वर ने सीधे कैन का पाप उसे दिखाया (उत्पत्ति 4:6), परन्तु यह उसे उसके क्रोध को शान्त करने के लिए पर्याप्त नहीं था, जो उसके भाई हाबिल की हत्या में पूरी रीति से व्यक्त होता है। कैन को अपने शेष जीवन भर भगोड़ा और पथिक होने के छोड़ दिया गया। क्या कैन में ऐसे रोष और क्रोध के लक्ष्ण थे जिनका समाधान किया जा सकता था? क्या आदम ने मध्यस्थता की, या क्या वह चुपचाप बैठा रहा, जैसा उसने तब किया था जब हव्वा को साँप के द्वारा धोखा दिया गया था?

इसहाक: एसाव की आवेगशीलता और याकूब का छल

पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि बालों वाला एसाव “जंगल का निपुण शिकारी बन गया” (उत्पत्ति 25:27), फिर भी वह उन जानवरों के समान ही आवेगी प्रतीत होता था जिनका वह शिकार करता था। अपने भाई को दाल के एक कटोरे के लिए अपने पहलौठेपन का अधिकार केवल इसलिए बेचना क्योंकि वह थक गया था और जंगल से थका-मांदा घर आया था, कोई बुद्धिमानी भरा निर्णय नहीं था (उत्पत्ति 25:30-34)। क्या उसने इस निर्णय पर सहमति जताने से पहले उसने उसके परिणामों के विषय में नहीं सोचा? वर्षों बाद, एसाव ने एक विदेशी पत्नी ले ली, यद्यपि उसके पिता इसहाक ने उसे “किसी कनानी लड़की से विवाह न करने” का निर्देश दिया था (उत्पत्ति 28:6)। सम्भवतः उसने ऐसा अपने पिता के प्रति द्वेष और अपने भाई के हाथों हुए छल की पीड़ा के कारण किया, फिर भी उसे एक विदेशी पत्नी के साथ रहने और परमेश्वर के वाचाई लोगों से दूर रहने के परिणामों को सहना पड़ा। यदि उसके पिता, इसहाक ने, एसाव को उसके मूर्खतापूर्ण निर्णयों के परिणामों की अनुभूति पहले ही करा दिया होता, तो क्या बाद के परिणाम भी वही होते जो हुए?

याकूब के द्वारा बकरी के बाल लगाने और अपने भाई के कपड़े पहनकर अपने बूढ़े, दृष्टिहीन पिता को धोखा देने वाला वृतान्त प्रसिद्ध है। परन्तु क्या याकूब के छल के संकेत पहले से नहीं थे, जब याकूब ने अपने भाई से पहिलौठे का अधिकार छीन लिया था? क्या वह अपने माता-पिता द्वारा दिए गए नाम, जिसका दोहरा अर्थ “एड़ी पकड़ने वाला” और “छल करनेवाला” था के अनुसार जीवन नहीं जी रहा था? जब उसके जुड़वाँ भाई एसाव को आभास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो उसने कहा, “क्या उसका नाम याकूब ठीक ही नहीं रखा गया है? उसने दो बार मुझ से छल किया है: उसने मेरा पहिलौठे का अधिकार तो ले ही लिया और अब मेरा आशीर्वाद नहीं रख छोड़ा” (उत्पत्ति 27:36)। इस कहानी की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि इसहाक को इसी समान छल और झूठ बोला गया था जैसे उसने अबीमेलेक से किया था (उत्पत्ति 26:7)। यदि इसहाक ने अपने स्वयं के छल को माना होता, तो वह अपने पुत्र को क्या सिखा सकता था?

याकूब: दीना की असन्तुष्टि और यूसुफ का घमण्ड

पवित्रशास्त्र में याकूब की एकमात्र नामित पुत्री दीना है। उत्पत्ति में लिखा है कि वह “देश की लड़कियों को देखने के लिए बाहर गई” (उत्पत्ति 34:1)। यह देश से आश्य शेकेम नामक एक मूर्तीपूजक, विदेशी नगर से है। किस बात ने उसे अपने परिवार को छोड़कर उस नगर की स्त्रियों के बीच कुछ प्राप्त करने जाने के लिए प्रेरित किया? शकेम में उसे उस स्थान की वास्तविक दुष्टता का पता चला जब उसका लाभ उठाने वाले एक व्यक्ति ने उसका भयानक उत्पीड़न किया था। क्या याकूब अपने ही जीवन में इतना व्यस्त था कि उसे अपनी बेटी की भटकती आँखों नही दिखीं, जो उसे दूर ले गई और इस क्रूर कृत्य के अनुभव से होकर गई?

जवान यूसुफ को दो स्वप्न मिले: स्वप्न जिसमें वह ऊँचा उठाया गया था और स्वप्न जिसमें उसके भाई उसके पैरों पर झुक रहे थे। इन स्वप्नों ने उसके भाइयों के मन में उसके प्रति और क्रोध भर दिया। उन्हें इन सपनों के विषय में कैसे पता चला? वे केवल इसलिए जानते थे क्योंकि यूसुफ ने उन्हें स्वयं बताया था। क्या यह उसकी युवावस्था की अपरिपक्वता थी या यह एक घमण्डी हृदय से उत्पन्न हुआ था, घमण्ड जो सम्भवतः याकूब द्वारा यूसुफ के प्रति पक्षपात से प्रेरित था (उत्पत्ति 37:3)? क्या याकूब ने अपने माता-पिता और भाई के साथ अपने ही अनुभव से इस प्रकार के पक्षपात के परिणामों को नहीं सीखा था?

पिताओं के लिए एक आह्वान

यदि समय अनुमित देता तो हम अपना अध्ययन मानोह और शिमशोन, एली और उसके पुत्रों, शमूएल और उसके पुत्रों, या दाऊद और अबशालोम तक बढ़ा सकते थे। मेरा उद्देश्य पिताओं पर अलोचना करना नहीं है, न ही केवल “क्या होगा यदि” के काल्पनिक प्रश्नों को उठाना है। परमेश्वर ने अपने उद्धार की योजना के लिए इन पिताओं और बच्चों की पापपूर्ण स्थितियों का उपयोग किया, जो दर्शाता है कि उसका अनुग्रह वास्तव में हमारे सभी पापों से कहीं अधिक बढ़कर है।

इन सभी घटनाओं पर परमेश्वर के सम्प्रभु होने से न तो उन व्यक्तियों की पीड़ा और परिणामों के अनुभव को कम किया जा सकता है, न ही पाप के भयानक प्रभावों को कम किया जा सकता है जिन्हें हम अपने परिवारों में सहते हैं। यहाँ उल्लिखित सभी पाप, यद्यपि एक विस्तृत सूची नहीं हैं, न केवल अतीत के पाप हैं, परन्तु हमारे अपने बच्चों में (और प्रायः पिता के रूप में हम में भी) दिखाई देते हैं। जब हम अपने बच्चों में ऐसी ही पापपूर्ण प्रवृत्ति देखते हैं, तो पिताओं को यह आशा करते हुए कि हमारे बच्चों के साथ कुछ भी बुरा नहीं होगा निष्क्रिय नहीं बैठना चाहिए। उपरोक्त घटनाएँ संकेत करती हैं कि इसकी कम हीसम्भावना है। इसके विपरीत, हमें अपने बच्चों के हृदयों और मनों को सत्य से सम्बोधित करना चाहिए, और जब वे पाप करते हैं, तो उन्हें प्रेम से क्षमा और पश्चाताप के द्वारा धार्मिकता के मार्ग पर वापस लाना चाहिए। पिताओं के रूप में हमें विश्वास की यात्रा में अपने बच्चों के लिए चरवाहा और मार्गदर्शक होने के लिए बुलाया गया है। हम अपने बच्चों के लिए यशायाह की वाणी के जैसे बनें: “जब कभी दाहिने या बाएँ मुड़ने लगो तो तुम्हारे कान पीछे से यह वचन सुनेंगे, ‘मार्ग यही है, इसी पर चलो’” (यशायाह 30:21)। 

परन्तु, बाइबल में दिए गए सभी पिता-पुत्र सम्बन्धों के सभी उदाहरणों के मध्य, हमें सिद्ध पिता-पुत्र के सम्बन्ध के उस एक उदाहरण को नहीं भूलना चाहिए, जिसका पतन नहीं हुआ, जो कभी लड़खड़ाया नहीं है और कभी असफल नहीं होगा। पितृत्व के कार्यों और न करने योग्य कार्यों से परे, आइए हम सर्वदा ख्रीष्ट ने जो किया गया है, पूरा किया गया है और समाप्त किया गया है, उसमें विश्राम करें, जिसने मृत्यु तक भी अपने पिता का पूरी रीती से आज्ञा पालन किया। उस पिता-पुत्र सम्बन्ध से हम पिताओं के लिए सारा अनुग्रह, दया और सामर्थ्य आती है जब हम ईश्वरभक्ति में बढ़ते हैं और अपने परिवारों के लिए भी ऐसा ही करने की इच्छा रखते हैं।                

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

जोएल स्मिथ
जोएल स्मिथ
जोएल ई. स्मिट, स्मिर्ना, जॉर्जिया में स्मिर्ना प्रेस्बिटेरियन चर्च के वरिष्ठ पादरी हैं।