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धर्मसुधार कैसे फैला?

जर्मनी के विटिनबर्ग से लेकर पूरे यूरोप और इग्लैंड तक प्रोटेस्टेन्ट धर्मसुधार का तीव्र फैलाव संसार का चक्कर लगाने वाले किसी ईश्वरविज्ञानीय उद्यमी के प्रयासों से नहीं हुआ। इसके विपरीत, मार्टिन लूथर का अधिकतर कार्यकाल विटनबर्ग के गाँव के विश्वविद्यालय में पढ़ाने में बीता। उसकी स्थिर स्थिति के बाद भी, लूथर का प्रभाव विटनबर्ग से पूरे संसार में फैला—जैसे जब एक पत्थर तालाब में गिराया जाता है। धर्म सुधार का तीव्र विस्तार आरम्भ से ही इंगित किया गया था जब निन्नयान्नवे थीसिस (जो कि अध्यापकों के मध्य ईश्वरविज्ञानीय वार्तालाप के लिए था) को कलीसिया के द्वार पर प्रकाशित किया गया। लूथर की जानकारी और अनुमति के बिना, उसके थीसिस लतीनी से जर्मन भाषा में अनुवाद किए गए और प्रेस में छपवाकर दो सप्ताह के अन्दर जर्मनी के प्रत्येक गाँव में उनका वितरण किया गया। यह बाद में आने वाली बातों का संकेत सूचक था। लूथर के सन्देश को यूरोप के महाद्वीप और इंग्लैंड तक फैलाने के लिए कई साधन उपयोग किए गए।

एक बहुत महत्वपूर्ण साधन वे वस्तुतः हज़ारों छात्रों का प्रभाव था जो विटिनबर्ग विश्वविद्यालय में पढ़ते थे जिनको लूथर का ईश्वरविज्ञान और कलीसियाई सिद्धान्त की शिक्षा दी गई। स्विट्जरलैंड के जेनीवा में कैल्विन की अकादमी के समान, विटनबर्ग का विश्वविद्यालय धर्म सुधार के विचारों के प्रसार के लिए निर्णायक स्थान बन गया। विटरबर्ग और जेनीवा संसार भर में आंदोलन के लिए मुख्य केन्द्र के रूप में खड़े हुए।

प्रिन्टिंग-मशीन ने लूथर के लिए सम्भव किया कि अपने विचारों को उन कई पुस्तकों के माध्यम से जिसने उसने सम्पादित किया, फैला सके, और साथ ही उसके पत्रों, अंगीकार लेख, धर्मप्रश्नोत्तरी, पत्रिका और कार्टून के माध्यम से भी (उन दिनों के आम लोगों के लिए संचार का एक बहुत प्रभावशाली साधन कार्टून के द्वारा सन्देशो का संचार किया जाना था)।

छापने के इन प्रणालियों के अतिरिक्त, धर्मसुधार में संगीत का उपयोग किया गया प्रोटेस्टेन्ट विश्वास के सिद्धान्तों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए गीत और भजन को लिखने के द्वारा। धार्मिक नाटक का उपयोग किया गया कलीसियाओं में नहीं परन्तु बाज़ारों में आंदोलन के मुख्य विचार का संचार करने के लिए—बाइबलीय सुसमाचार को पुनः प्राप्त करना।

धर्मसुधार के विस्तार का एक और उपेक्षित पहलू कलीसिया पर कला का प्रभाव है। लकड़ी के साँचे और चित्रों का निर्माण उस समय के महान कलाकारों द्वारा किए गए—अल्ब्रेक्ट ड्यूरर, हान्स होलबेन, लुकास क्रैनाख द एल्डर और पीटर विस्चर। धर्म सुधारकों के चित्रों ने उनके सन्देश को अधिक पहचानने योग्य बना दिया, क्योंकि यह कला के संसार में उनके चेहरे से जुड़ा था।

विटिनबर्ग में अध्ययन करने वाले इंग्लैंड के छात्रों का भी ग्रेट ब्रिटेन में धर्म सुधार को लाने में बड़ा प्रभाव रहा। सम्भवतः इंग्लैंड के धर्मसुधार में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति विलियम टिन्डेल था, जिसका अंग्रेज़ी में बाइबल का अनुवाद का बड़ा महत्व था। 1524 में, वह यूरोप के लिए इंग्लैंड छोड़कर कुछ समय के लिए विटिनबर्ग में अध्ययन करने के लिए गया। नया नियम का उसका पहला संस्करण 1526 में फ्लैंडर्स में प्रकाशित किया गया, जो वर्म्स की महासभा के पांच साल बाद था जिस में लूथर ने अपना प्रसिद्ध “मैं यहाँ खड़ा हूँ” भाषण दिया था। इनमें से हज़ारों बाइबल गुप्त रीति से इग्लैंड लाए गए। बहुतों को विधर्मी के कार्य के रूप में जला दिया गया, परन्तु अन्य बाइबल आग से बच गई. और उन्होंने अपने आप ईश्वरविज्ञानीय आग का उत्पादन किया।

एक अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति रॉबर्ट बार्न्स था, जो कैम्ब्रिज के एक अगस्तीनी मठवासी था, जिसे 1540 में आग में जलाकर मार दिया गया था। शहीद होने के सात वर्ष पहले, उसने विटिनबर्ग विश्वविद्यालय में पढ़ाई की थी। मार्टिन ब्यूसर भी एक महत्वपूर्ण धर्म सुधारक था, जिसे 1551 में इंग्लैंड के प्रोटेस्टेन्ट द्वारा ब्रिटेन आने और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने के लिए आमंत्रित किया गया।

उन लोगों के अतिरिक्त, जिन्होंने इंग्लैंड के धर्म सुधार को प्रभावित किया सीधे लूथर के जर्मनी से, वे लोग थे जिनका प्रभाव अधिक घुमावदार मार्ग से आया, जो कि स्विट्ज़रलैंड के जेनीवा के माध्यम से था। जॉन कैल्विन को स्वयं पैरिस से भागना पड़ा, उन विचारों के कारण जिन्हें उसने अपने मित्रों से सीखा था जो मार्टिन लूथर की शिक्षा से प्रभावित थे। इस फ्रांसीसी ने जेनीवा में शरण पाई, जहाँ से उसका प्रचार मंच और शिक्षा की सेवा विश्व भर में प्रसिद्ध हुए। जेनीवा एक शरण का शहर बन गया उन निर्वासित व्यक्तियों के लिए जो यूरोप के अलग-अलग स्थानों से सुरक्षा के लिए भाग कर आए थे। कैल्विन के जेनीवा में निर्वासन में भेजने वाले देशों में से कोई भी इंग्लैंड और ब्रिटेन के द्वीप समूह से अधिक महत्वपूर्ण नहीं था। जॉन नॉक्स ने, जिसने स्कॉटलैंड में धर्मसुधार का नेतृत्व किया, कुछ समय स्विट्ज़रलैण्ट में कैल्विन के चरणों में बिताया, अपने धर्मसुधार ईश्वरविज्ञान को सीखते हुए। यद्यपि कैल्विन लूथर से छब्बीस वर्ष छोटा था, फिर भी लूथर के विचारों ने युवा कैल्विन के जीवन पर एक उत्तेजक प्रभाव डाला जबकि वह अभी बीस वर्ष का था। यद्यपि कैल्विन को साधारण रीति से पहले से ठहराए जाने के सिद्धान्त से सम्बन्ध में देखा जाता है, यह प्रायः अनदेखा किया जाता है कि पहले से ठहराए जाने तथा चुनाव पर कैल्विन के दृष्टिकोण में कुछ भी नहीं था जो पहले लूथर के द्वारा व्यक्त नहीं किया गया था, विशेष रीति से लूथर के प्रसिद्ध काम ‘द बॉन्डेज ऑफ़ द विल’ में।

जब कैल्विन जेनीवा में शिक्षा दे रहा था, निर्दयी मैरी इंग्लैंड के सिंहासन पर आसीन हुईं। उसके शासन काल में, कई प्रोटेस्टेन्ट को आग में जलाकर मार दिया गया। जो लोग आग से बच गए, वे बड़ी संख्या में जेनीवा भाग गए। इंग्लैंड के कुछ निर्वासित लोगों को कैल्विन के देख-रेख के अधीन बाइबल को अंग्रेज़ी में अनुवाद करने के कार्य को आरम्भ किया। जेनीवा बाइबल नामक यह बाइबल, पहली ऐसी बाइबल थी जिसमें पृष्ठ के नीचे या किनारे ईश्वरविज्ञानीय टिप्पणियां लिखी गई थीं, और ये टिप्पणियां कैल्विन के प्रचार से भारी रीति से प्रभावित थीं। यह बाइबल इग्लैंड के लोगों के मध्य में प्रमुख बाइबल थी अगले सौ वर्षों के लिए इससे पहले कि वह लोकप्रिय किंग जेम्स  संस्करण द्वारा उस स्थान से हटाया गया। यह स्कॉटलैंड की प्रेस्बिटेरियन कलीसिया का मूल, आधिकारिक संस्करण था। यह शेक्सपियर की बाइबल थी, जिस बाइबल को मेयफ्लवर जहाज़ में इग्लैंड के पिताओं अपने साथ अमेरिका लेकर आए, और यह बाइबल अमेरिका के आरम्भिक उपनिवेशियों के बीच मुख्य बाइबल थी।

विटनबर्ग से सीधे इंग्लैंड, या विटनबर्ग से जेनीवा या जेनीवा से इंग्लैंड तक, इस घुमावदार मार्ग में, धर्मसुधार के बीज जो जर्मनी में लगाए गए थे पूरी तरह खिल गए जब वे इंग्लैंड के साम्राज्य तक पहुँचे। विटिनबर्ग से लंदन के लिए मार्ग का पता लगाने के लिए, किसी को घुमावदार मार्ग की श्रृंखला को देखना होगा, परन्तु विटिनबर्ग में उस आंदोलन का उद्गम निश्चित है, और इसका प्रभाव लगातार आज भी बना हुआ है।

यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।
आर.सी. स्प्रोल
आर.सी. स्प्रोल
डॉ. आर.सी. स्प्रोल, लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ के संस्थापक थे, जो सैनफोर्ड, फ्लोरिडा में सेंट एंड्रयू चैपल के पास्टर और रिफॉर्मेशन बाइबल कॉलेज के पहले अध्यक्ष थे। वह सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक थे, जिसमें द होलिनेस ऑफ गॉड सम्मिलित है।