
ख्रीष्टीय जीवन
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30 सितम्बर 2025आत्मा का विश्राम
– जोनाथन एल. मास्टर द्वारा
ख्रीष्ट के सबसे अनमोल प्रतिज्ञाओं में से एक यह है कि वह प्राण को विश्राम प्रदान करेगा। महान कलीसिया पिता ऑगस्टीन ने “द कन्फेशन्स” में प्रसिद्ध रूप से लिखा था, “हे प्रभु, तूने हमें अपने लिए बनाया है, और हमारे हृदय तब तक व्याकुल रहते हैं जब तक उन्हें तुझ में विश्राम न मिल जाए।” यीशु ने विश्राम की इसी आवश्यकता को सम्बोधित करते हुए कहा:
हे सब थके और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओः मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जुआ अपने ऊपर उठा लो और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जुआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।” (मत्ती 11:28-30)
यह कितना अद्भुत आश्वासन है: हमारे प्राणों के लिए विश्राम। क्या हमें इसी की आवश्यक्ता नहीं है?
जे.सी. राय्ल ने यीशु के शब्दों में निहित गहन प्रोत्साहन को पहचाना। उन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के इंग्लैंड के दृष्टिकोण से लिखा, परन्तु मानवीय स्थिति के विषय में उनका विश्लेषण ऑगस्टीन के विश्लेषण से भिन्न नहीं था: परमेश्वर के बिना हम व्याकुल और हताश हैं। राय्ल ने लिखा:
ये शब्द कितने उत्साहवर्धक और सान्त्वना देने वाले हैं! बेचैनी संसार की एक बड़ी विशेषता है: उतवाली, उत्पीढ़न, असफलता, निराशा, ये सब हमें प्रत्येक स्थान में घूरते हैं। परन्तु यहाँ आशा है: थके हुए लोगों के लिए एक शरण-स्थान है, ठीक वैसे ही जैसे नूह के कबूतर के लिए था। ख्रीष्ट में विश्राम है, विवेक का विश्राम, और हृदय का विश्राम है, विश्राम जो सारे पापों की क्षमा पर आधारित है, और जो परमेश्वर के साथ शान्ति से प्रवाहित है।
प्राण के लिए विश्राम केवल यीशु के माध्यम से ही मिल सकता है। मनुष्य अन्य वस्तुओं में विश्राम पाने के लिए बहुत कुछ करते हैं, परन्तु प्रत्येक असफल प्रयास के साथ, प्राण की बेचैनी और भी प्रबल रूप से प्रकट होती है। हम केवल ख्रीष्ट के पास आकर, उसका जुआ उठाकर और उससे सीखकर अपना विश्राम पाते हैं। यीशु में विश्राम पाकर, हम अपने प्राणों का सच्चा विश्राम पाते हैं।
ऑगस्टीन और राय्ल ने उसी बात को समझा, जिसे सत्रहवीं शताब्दी के शुद्धतावादी पास्टर थॉमस विन्सेंट ने भी सोचा और संजोकर रखा। उन्होंने ख्रीष्ट में प्राण के विश्राम की व्याख्या इस प्रकार की:
प्राण उद्धार के लिए ख्रीष्ट पर तब निर्भर रहता है, जब उसे पाप के कारण अपनी खोई हुई स्थिति का, तथा अन्य प्राणियों के साथ-साथ इस अपर्याप्तता स्थिति से बाहर निकलने में अपनी असमर्थता का निश्चय होता है, तथा ख्रीष्ट की बचाने की क्षमता और इच्छा का पता चलने, और उसे विश्वास हो जाने पर, वह प्राणियों पर से सारी पकड़ छोड़ देता है, और अपनी धार्मिकता का त्याग देता है, और इस प्रकार उद्धार के लिए केवल ख्रीष्ट को पकड़ लेता है, उस पर भरोसा करता है, और उसी पर विश्वास रखता है।
क्या आपको अपने प्राण को विश्राम देने में अपनी असमर्थता का पता चला है? क्या आपको ख्रीष्ट की उद्धार करने की क्षमता और इच्छा पर विश्वास है? क्या आपने उद्धार के लिए उसका सहारा लिया है? यीशु के पास आएँ, और वह आपको विश्राम देगा। केवल उसी में विश्राम करें, और आपको अपने थके हुए प्राण के लिए विश्राम मिलेगा।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

