अनन्त याजक- लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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अनन्त याजक

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पांचवा अध्याय है: प्रतिज्ञात मसीहा

भजन 110 की विशिष्टता है कि यह पुराने नियम का वह स्थल है जिसका नए नियम में सबसे अधिक बार उद्धरण किया गया है। राजा दाऊद द्वारा लिखित, भजन 110 एक राजकीय भजन है जो भविष्य में आने वाले मसीहाई राजा के स्वर्गारोहण और शासन के विषय में भविष्यद्वाणी करता है।  दाऊद कहता है, कि यह राजा, यहोवा के सामर्थ्य में आएगा (पद 2) और सम्पूर्ण पृथ्वी पर परमेश्वर का राज्य स्थापित करेगा (पद 5)। वह राष्ट्रों का न्याय करेगा (पद 6), परमेश्वर के शत्रुओं को नष्ट कर देगा (पद 1, 6), और परमेश्वर के लोगों को अपने पास एकत्रित करेगा (पद 3)। और एक विशेषकर ध्यान आकर्षित करने वाले खण्ड में,  दाऊद इस राजा को “मेरा प्रभु” भी कहता है (पद 1), 

अपने राजकीय वंश की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हुए (पद 1)।

इस अद्भुत भविष्यद्वाणी के केन्द्र में पुराने नियम के सबसे अज्ञात पात्रों में से एक आता है होता है। दाऊद कहता है, “यहोवा ने शपथ खाई है और वह उस से न बदलेगा, “तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है” (पद 4)। मलिकिसिदक पुराने नियम में केवल एक बार ही प्रकट होता है। इब्राहीम के द्वारा पूर्व के चार राजाओं को पराजित करने और अपने भतीजे लूत को छुड़ाने के बाद, उसका सामना मलिकिसिदक से हुआ, जिसे शालोम का राजा और परमप्रधान परमेश्वर के याजक के रूप में पहचाना जाता है (उत्पत्ति 14:18-20)। दाऊद इस रहस्यमय चरित्र में यीशु ख्रीष्ट के व्यक्तित्व और कार्य का संकेत पाता है, दोनों महान राजा और उसके लोगों के महान महायाजक के रूप में। 

राजकीय याजक
प्राचीन संसार में राजाओं के लिए याजक के रूप में भी कार्य करना सामान्य बात थी। उन्होंने न केवल राजनैतिक क्षेत्र पर वरन पवित्र क्षेत्र पर भी शासन किया। परन्तु, इस्राएल के लिए, ऐसा याजक-राजा होना असम्भव था। परमेश्वर ने राजत्व को यहूदा के गोत्र को दिया था, विशेष रीति से दाऊद के कुल को (2 शमूएल 7:12-16)। परन्तु, याजकपद को, उसने केवल लेवी के गोत्र को सौंपा, विशेष रूप से हारून के वंशजों को (गिनती 17)।

फिर भी, दाऊद समझ गया था कि इस्राएल का मसीहाई राजा सभी लोगों पर राज्य करेगा, जिसमें याजकों के लिए अलग किया हुआ पवित्र क्षेत्र भी सम्मिलित है। परन्तु किस आधार पर इस्राएल का राजा याजक के रूप में भी सेवा कर सकता था? क्योंकि, क्या राजा शाऊल को याजकीय विशेषाधिकारों का प्रयोग करने के लिए अस्वीकार नहीं किया गया था (1 शमूएल 13:13-14)? दाऊद मलिकिसिदक में न केवल एक और याजकपन का आधार पाता है परन्तु एक श्रेष्ठ याजकपन की आशा भी करता है। इसी प्रकार से तर्क करते हुए, इब्रानियों का लेखक इब्राहीम से मलिकिसिदक की श्रेष्ठता की स्पष्ट अभिव्यक्ति के रूप में इब्राहीम द्वारा अपनी लूट का दसवां अंश मलिकिसिदक को देने और उससे एक आशीष प्राप्त करने की ओर इंगित करता है (इब्रानियों 7:4-10)। और यदि मलिकिसिदक इब्राहीम से श्रेष्ठ है, तो वह निश्चय ही इब्राहीम के वंशज लेवी से भी श्रेष्ठ है। मलिकिसिदक, जिसके नाम का अर्थ “धार्मिकता का राजा” है, इस प्रकार से एक उत्तम याजकपन का प्रतिनिधित्व करता है, आंशिक रूप से, क्योंकि वह राजकीय याजक है। यीशु की सेवकाई की ओर पहले से संकेत करते हुए, मलिकिसिदक याजक और राजा दोनों था। 

इस तथ्य में विश्वासियों के लिए एक अद्भुत प्रोत्साहन है कि यीशु राजा और याजक के पदों को एक करता है। यदि यीशु केवल राजा होता, तो हम उचित रीति से उसके धर्मी न्याय का भय में जीवन जी सकते थे। परन्तु अच्छा समाचार यह है कि यह धर्मी राजा जो अपने लोगों पर शासन करता है, वह महायाजक भी है जो स्वयं को उनके लिए प्रायश्चित बलिदान के रूप में अर्पण करता है और पिता के सम्मुख उनके लिए एक मध्यस्थ के रूप में खड़ा होता है। वास्तव में, क्योंकि हमारे पास एक ऐसा महायाजक है, जो “हमारी निर्बलताओं में हमसे सहानुभूति रखने में” सक्षम है (इब्रानियों 4:15) और हम “साहस के साथ अनुग्रह के सिंहासन के निकट आएं, कि हम आवश्यकता के समय हमारी सहायता हो” (पद 16)। सर्वश्रेष्ठ याजक-राजा यीशु में, हम ऐसे परमेश्वर को पाते हैं जो हमारे दुखों को जानता है, जिसने हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया, और जो हमारे दयालु प्रभु के रूप में हम पर शासन करता है।

युगानुयुग का याजक
यीशु का याजकीय पद लेवी याजक पद से इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि यह एक अनन्त याजकीय पद है। दाऊद कहता है, “यहोवा ने शपथ खाई है और वह उस से न बदलेगा, “तू युगानुयुग याजक है” (भजन 110: 4)। लेवी याजकों के विपरीत, जिनके लिए वंशावली उनकी सच्चाई स्थापित करने के लिए आवश्यक थी, उत्पत्ति में या किसी और पुस्तक में मलिकिसिदक की वंशावली का कोई वर्णन नहीं है। उसके जन्म या उसकी मृत्यु, उसके वंश या पीढ़ियों का कोई वर्णन नहीं है। जैसा कि इब्रानियों के लेखक ने समझदारी से व्याख्या किया है, उत्पत्ति 14 में मलिकिसिदक का वर्णन उसे एक अनन्त गुण प्रदान करती है, वह गुण जो यीशु के महायाजकपन के अनन्त स्वभाव को दर्शाता है (इब्रानियों 7:3)।

लेवी याजकों की एक कमी थी कि जो लोग याजकों के रूप में सेवा करते थे उनकी दुर्भाग्यपूर्ण प्रथा थी कि वे मर जाते थे। इस प्रकार, जैसे इस्राएल के लिए नए बलिदानों की निरन्तर आवश्यकता थी, वैसे ही नए याजकों की निरन्तर आवश्यकता थी। परन्तु यीशु का याजकीय कार्य विशिष्ट है। वह युगानुयुग याजक है। उसके पापरहित होने के कारण, यीशु द्वारा स्वयं को सिद्ध और अन्तिम बलिदान के रूप में अर्पित करने पश्चात भी, मृत्यु उसे रोक न सकी (पद 16)। और इसलिए वह सर्वदा के लिए पिता के दाहिने हाथ पर खड़ा है।

ख्रीष्ट में विश्वासियों के लिए, यीशु का अनन्त महायाजकपद को दैनिक आश्वासन का स्रोत होना चाहिए। यह एक स्मारक है कि जब हम परमेश्वर को भूल जाते हैं, तो वह हमें नहीं भूला है। जब हम, अपनी अनाज्ञाकारिता के द्वारा, परमेश्वर को त्याग देते हैं, तो हम जान सकते हैं कि उसने हमें त्यागा नहीं है (इब्रानियों 13:5)। स्वर्ग में हमारा एक सिद्ध मध्यस्थ है जो हमारे लिए अपने स्वयं के लहू बहाए जाने के गुणों की याचना करता है, जो हमें उसी पर विश्वास और पश्चाताप के द्वारा परमेश्वर के पास लाता है। भजन 110 इस अनन्त याजकीय राजा, यीशु ख्रीष्ट के आगमन की आशा करता है और उत्सव मनाता है।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
स्टीफन एम. कोलमैन
स्टीफन एम. कोलमैन
डॉ. स्टीफन एम. कोलमैन फिलाडेल्फिया में वेस्टमिन्स्टर थियोलॉजिकल सेमिनरी में पुराने नियम के सहायक प्राध्यापक हैं और जे. ऐलन ग्रोव्स सेंटर फॉर एडवांस्ड बिब्लिकल रिसर्च में वरिष्ठ शोधकर्ता हैं।