शान्ति का राजकुमार | लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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शान्ति का राजकुमार

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का छठवां अध्याय है: प्रतिज्ञात मसीहा

कल्पना कीजिए कि जिस देश से आप प्रेम करते थे, वह अब विभाजित, टूटा हुआ, भ्रष्ट नेतृत्व द्वारा उखाड़ फेंका गया, विशाल अन्तर्राष्टीय शक्तियों द्वारा संकट में डाला गया, और प्रतीत होता है कि पतन के तट पर। कल्पना कीजिए कि आपके सबसे अच्छे नेता भद्दा चरित्र, दुविधा और नासमझी के अन्तर्राष्टीय संधि से अपंग हैं। आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में यरूशलेम में राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ इन अन्धेरे चिंताओं से प्रभावित किए गए थे और इन्होंने यशायाह 9: 6-7 की भविष्यवाणी की सन्निकट पृष्ठभूमि प्रदान की। इस्राएल का उत्तरी राष्ट्र दिक्षिण में अपनी बहन, यहूदा से विरुद्ध हो गई, उत्तर में सीरिया के साथ एक बुरी-परामर्श वाले गठबंधन के कारण, एक ऐसी संधि जिसके कारण से दोनों पक्षों को अश्शूर की सेना द्वारा विनाश की ओर ले जाया गया। यहूदा अकेला रह गया था और उसके बचने की सम्भावनाएं कम हो रहीं थीं।

इस विकट स्थिति में, यशायाह ने एक ऐसे बच्चे के विषय में आशा की भविष्यवाणी की जो राज्य में जन्म लेगा और संसार में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय पुनःस्थापना को लाएगा।

खण्ड दक्षिणी श्रोताओं को आश्वस्त करने के साथ आरम्भ होता है कि निर्वासन से पुनर्स्थापना में उत्तरी राष्ट्र को सम्मिलित किया जाएगा (9:1)। आने वाली पुनर्स्थापना में इस्राएल के सभी बच्चे, यहाँ तक कि विद्रोही उत्तरी राष्ट्र के गोत्र भी सम्मिलित होंगे (देखें यहेजकेल 37:16-17)। उत्तर और उसकी राजधानी, सामरिया के लिए भी, एक दिन बन्धुवाई का अन्धकार समाप्त हो जाएगा, और पुनर्स्थापना का सूर्योदय और नया राजा प्रकट होगा। मत्ती का सुसमाचार दिखाता है कि कैसे राज्य की पुनर्स्थापना यीशु ख्रीष्ट की सेवकाई में आती है (मत्ती 4:12-16)। वह अन्धकार में चमकने वाली ज्योति है।

यशायाह के दृष्टिकोण से, महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आने वाली पुनर्स्थापना में इस्राएल के दो राज्यों का पुनर्मिलन

दाऊद के वंश से एक राजा के अधीन होगा (देखें 2 शमूएल 7:14)। बच्चे का जन्म निर्वासन में उनके कष्टों के अन्त का प्रतीक होगा। यशायाह 9 का बच्चा वह नया राजा है जो निर्वासन के लम्बे वर्षों के पश्चात परमेश्वर के लोगों के लिए पुनर्स्थापना अवधि का उद्घाटन करेगा।

यशायाह 9:1-7 एक राज्याभिषेक समारोह का स्मरण दिलाता है जिसमें राजकीय उपाधि नागरिकों और गणमान्य व्यक्तियों के सामने ऊंचे स्वर के साथ से पढ़े जाते हैं। यहाँ पर, प्रत्येक उपाधि नए राज्य-संरक्षक की उत्कृष्ट विशेषताओं को दर्शाता है जो उसकी सेवा करेगा जब वह अपने भविष्य के राज्य को प्रकाश के रूप में स्थापित करता है जो आने वाले निर्वासन के अन्धेरे को बदल देगा।

अद्भुत युक्ति करने वाला। आधुनिक दर्शकों को इस उपाधि का अर्थ अस्पष्ट लग सकता है। इस विषय में एक युक्ति करने वाले में बुद्धि और उसकी शिक्षाओं का स्वामी सम्मिलित है। यह बुद्धिमान-परामर्शदाता राजा के दरबार में सेवा करता, जो भूमि के लिए न्यायतंत्र के प्रमुख के रूप में शासन करता था। परन्तु, पुनर्स्थापना का राजा, बुद्धि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट होगा, पुराने समय के सुलैमान के जैसे, परन्तु स्वयं चमत्कारी अनुपात का परामर्शदाता होगा जिसका परामर्ष पुष्टि करने वाले आश्चर्यकर्मों के साथ होती है (मत्ती 12:42; लूका 11:31; 1 कुरिन्थियों 1:24)। इस प्रकार, वह पुराने बुरे नेतृत्व की समस्या का समाधान करेगा (यशायाह 3:3)।

पराक्रमी परमेश्वर। यह शीर्षक इंगित करता है कि राजा की पहचान उस ईश्वरीय सम्प्रभु जन के साथ की जाएगी जिससे उसका अधिकार प्राप्त होता है। यह राजा इस्राएल के पहले राजा, शाऊल के जैसे नहीं होगा, जो “अपनी दृष्टि में छोटा” था (1 शमूएल 15:17), एक असुरक्षा जिसके कारण वह राष्ट्र को अपने ही उद्देश्य की ओर ले गया, न कि प्रभु के उद्देश्यों की ओर। पुनर्स्थापना करने वाले राजा की पहचान उस सर्वशक्तिमान ईश्वरीय राजा के साथ की जाएगी, जिससे वह, और हर दूसरी सांसारिक शक्ति, पृथ्वी पर अपना अधिकार प्राप्त करता है (मत्ती 28:18)।

अनन्तकाल का पिता। इस उपाधि में सिंहासन की एक और विशेषता सम्मिलित है: राष्ट्र के पिता के रूप में राजा। ख्रीष्टीय लोग स्मरण रखेंगे कि यीशु द्वारा शिष्यों को सिखाई गई प्रार्थना में परमेश्वर का पितृत्व प्राथमिक विषय है (6:9)। उस प्रार्थना में, विश्वासी परमेश्वर से एक ऐसे पिता के रूप में प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिसका राज्य आएगा और जिसकी राजसी इच्छा सांसारिक और स्वर्गीय क्षेत्र में भी पूरी होगी। यशायाह 9 में, “पिता” भाषा का अर्थ इतनी घनिष्ठता के लिए नहीं है जितना कि वह उस सम्मान के लिए जिसके साथ कोई राजा का मानता है (यूहन्ना 10:30; 14:9-10)।

शान्ति का राजकुमार। यह अन्तिम शीर्षक आने वाले पुनर्स्थापित राज्य की प्रचुरता और पूर्णता को दर्शाता है। “राजकुमार” शीर्षक “राजा” की तुलना में सरकार में कम अधिकार का शीर्षक नहीं है, किन्तु यह शासन करने वाले अधिकारियों का एक बड़ा समूह को सम्मिलित करता है। न केवल दाऊद का आने वाला पुत्र राजा होगा, वह एक ऐसा शासक होगा जो राज्य के लिए शालोम—शान्ति—लोक-कल्याण और सामुदायिक पूर्णता के समय का आरम्भ करेगा। न्याय किया जाएगा। निर्धनों और शोषितों को विश्राम दिया जाएगा। और प्रत्येक जन पूरी रीति से अपने परमेश्वर द्वारा नियुक्त कार्यों के लिए जीएगा (यूहन्ना 17:20-23; गलातियों 3:27-29; फिलिप्पियों 1:6)।

यशायाह नबी के लिए, इस राज्य की और उसके राजा की पुनर्स्थापना के आश्वासन ने आशा और उत्सव का एक बड़ा कारण प्रदान किया। उसके दिन अन्धकारमय थे, और वे और भी अन्धकार होते जा रहे थे, परन्तु प्रभु अपनी “धुन” (9:7) में अन्धकार को सदा के लिए नहीं रहने देंगे। यशायाह के श्रोताओं के साथ हमारी बहुत समानता है। निर्वासन की घोर वास्तविकताओं में परमेश्वर जितना अधिक समय तक अनुपस्थित प्रतीत हुआ, उतना ही अविश्वसनीय यह दृढ़ कथन था कि एक पुनर्स्थापना करने वाला राजा आ रहा था। हमारा दृढ़ कथन है कि राजा पुनः आ रहा है, वैसे ही अविश्वसनीय है, परन्तु हम उस राजा को जानते हैं जिसके विषय में यशायाह बोल रहा था। हम उसे जानते हैं, और वह हमारे लिए पुनः आ रहा है, और उसकी वापसी महिमामय होगी।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
डॉ. स्कॉट रेड
डॉ. स्कॉट रेड
डॉ. स्कॉट रेड वाशिंगटन, डी.सी. में रिफॉर्म्ड थियोलॉजिकल सेमिनरी में अध्यक्ष तथा पुराने नियम के सहायक प्रोफेसर हैं। वह द होलनेस इम्पेरेटिव (The Wholeness Imperative) नामक पुस्तक के लेखक हैं।