अनुग्रह के सामान्य साधन- लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
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अनुग्रह के सामान्य साधन

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पहला अध्याय है: अनुग्रह के साधारण साधन

मैंने कभी किसी ख्रीष्टीय को यह कहते नहीं सुना कि वह विश्वास नहीं करता कि परमेश्वर सम्प्रभु नहीं है। परन्तु मैंने कई ख्रीष्टियों को इस प्रकार परमेश्वर की सम्प्रभुता को परिभाषित करते हुए सुना है जो अन्ततः मनुष्य को परमेश्वर पर सम्प्रभु बनाता है। यह सम्प्रभुता की ऐसा दृष्टिकोण है जहाँ मनुष्य बड़ा है और परमेश्वर छोटा। लोग कहेंगे, “मैं जानता हूँ कि परमेश्वर सम्प्रभु है, किन्तु . . .।” सच्चाई यह है, कि बहुत सारे दावा करने वाले ख्रीष्टीय लोग वास्तव में यह विश्वास नहीं करते हैं कि परमेश्वर सम्प्रभु है। और यदि हम यह विश्वास नहीं करते कि परमेश्वर सम्प्रभु है, तो हम वास्तव में यह विश्वास नहीं करते कि परमेश्वर, परमेश्वर है। फिर भी, समस्या इस से कहीं अधिक गहरी है।

कई ख्रीष्टीय लोग जो कहते हैं कि वे विश्वास करते हैं कि परमेश्वर सब पर सम्प्रभु है, एक प्रकार की सम्प्रभुता पर विश्वास करते हैं जो बाइबलीय ईश्वरवाद की तुलना में इस्लाम आधारित नियतिवाद के समान है, एक प्रकार का ईश्वरवादी शून्यवाद जो यह विश्वास करता है कि हमारे कार्यों का कुछ महत्व नहीं है—कि परमेश्वर सम्प्रभु है और केवल हम तार पर लटके हुए कठपुतलियाँ हैं। यह परमेश्वर की सम्प्रभुता के विषय में बाइबलीय शिक्षा नहीं है। वह पवित्रशास्त्र में प्रकट करता है कि वह वास्तव में सब वस्तुओं पर सम्प्रभु है, कि उसने होने वाली सब घटनाओं को पहले से ही निर्धारित किया है, और कि वह न तो पाप का लेखक है और न अनुमोदन करने वाला है (यशायाह 46:10; याकूब 1:13; वेस्टमिन्स्टर विश्वास का अंगीकार 3.1)। वह प्रकट करता है कि वह सब बातों पर सम्प्रभु है और हम अपने कार्यों के लिए दण्डनीय हैं (प्रेरितों के काम 2:23)। वह प्रकट करता है कि वह ही प्रथम कर्ता है और द्वितीय कर्ताओं का उपयोग करता है—जैसे हम—अपने अन्ततः उद्देश्यों को पूरा करने के लिए (नीतिवचन 16:33; यूहन्ना 19:11)। वह प्रकट करता है कि जबकि उसने पहिले से सब बातों का अन्त ठहराया है, उसने सब बातों के अन्त के साधनों को भी निर्धारित किया है (प्रेरितों के काम 4:27-28)।

जब बात आती है परमेश्वर की हमारी आराधना की, तो बहुत से ख्रीष्टीय लोग यह सोचते हैं कि यह वास्तव में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि हम क्या करते हैं या हम यह कैसे करते हैं क्योंकि हमारा सम्प्रभु परमेश्वर अपने अन्तिम उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किसी भी साधन का उपयोग कर सकता है। परन्तु, यह हमारे द्वारा उन साधनों के उपयोग को उचित नहीं ठहराता, जिन्हें परमेश्वर ने हमें नहीं दिए हैं। फिर भी, कई ख्रीष्टीय लोग और कलीसियाएं विश्वास करते हैं कि हम कोई भी कुशलता से उत्पन्न किए गए साधनों को उपयोग कर सकते हैं हमारी इच्छा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए।

यदि हम वास्तव में विश्वास करते हैं कि परमेश्वर सम्प्रभु है, हमें अवश्य ही उसकी सम्प्रभुता से निर्धारित साधनों पर भरोसा रखना चाहिए उसकी इच्छा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए। वे साधन जिन्हें परमेश्वर ने हमारे आत्मिक पोषण के लिए और अनुग्रह में बढ़ोत्री के लिए ठहराया है वे हैं जिन्हें हम अनुग्रह के सामान्य साधन कहते हैं—अर्थात वचन, प्रार्थना, बपतिस्मा तथा प्रभु-भोज की रीति विधियाँ, और इन से आवश्यक रूप से जुड़े हुए कलीसियाई अनुशासन और प्राणों की देखभाल। ये साधन परमेश्वर के द्वारा ठहराए गए हैं, पवित्र आत्मा के द्वारा सशक्त किए गए हैं, और ख्रीष्ट की ओर इंगित करते हैं, और ख्रीष्ट के साथ हमारे मिलन में वे हमें बनाए रखते हैं और हमें पोषित करते हैं जब हम अपने त्रिएक परमेश्वर की सम्प्रभु उद्देश्यों में विश्राम करते हैं।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
बर्क पार्सन्स
बर्क पार्सन्स
डॉ. बर्क पार्सन्स टेबलटॉक पत्रिका के सम्पादक हैं और सैनफोर्ड फ्ला. में सेंट ऐंड्रूज़ चैपल के वरिष्ठ पास्टर के रूप में सेवा करते हैं। वेअश्योर्ड बाइ गॉड : लिविंग इन द फुलनेस ऑफ गॉड्स ग्रेस के सम्पादक हैं। वे ट्विटर पर हैं @BurkParsons.