परमेश्वर कौन है?

22 जनवरी 2021

परमेश्वर कौन है?

22 जनवरी 2021

सुसमाचार क्या है?

What is The Gospel?

एक मायने में, सम्पूर्ण बाइबल सुसमाचार है। उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक पढ़ते समय, हम मनुष्य जाति के लिए परमेश्वर का व्यापक अद्भुत सन्देश देखते हैं।

लेकिन अनेक लोग सम्पूर्ण बाइबल को पढ़ते हैं, और सुसमाचार के विषय में उनकी समझ एक दूसरे से भिन्न, अस्पष्ट, या फिर सीधे-सीधे गलत होती है। कुछ लोग सुसमाचार के विषय में कहते हैं कि परमेश्वर का अनुग्रह आर्थिक समृद्धि में उण्डेला जाता है। अन्य लोग ख्रीष्ट के नाम में एक राजनैतिक आदर्श राज्य का वर्णन करते हैं। फिर भी कुछ अन्य लोग ख्रीष्ट का अनुसरण करने, उसके राज्य में लाने, या पवित्रता में बढ़ने पर ज़ोर देते हैं। इसमें से कुछ बातें बाइबल से अवश्य हैं। परन्तु इसमें से कोई भी सुसमाचार नहीं है।

सौभाग्यवश, हम उन स्थलों की ओर फिर सकते हैं जो हमें, स्पष्टतः और सटीकता से बताते हैं कि सुसमाचार क्या है। उदाहरण के लिए, प्रेरित पौलुस समझाता है कि बाइबलीय सन्देश में “प्रथम महत्व” क्या है:

हे भाइयो, अब मैं तुम्हें वही सुसमाचार सुनाता हूं जिसका मैंने तुम्हारे मध्य प्रचार किया, जिसे तुमने ग्रहण भी किया और जिसमें तुम स्थिर हो, जिसके द्वारा तुम उद्धार भी पाते हो, इस शर्त पर कि तुम उस वचन को जिसका मैंने तुम्हारे मध्य प्रचार किया दृढ़ता से थामे रहो—अन्यथा तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। मैंने यह बात जो मुझ तक पहुँची थी उसे सबसे मुख्य जानकर तुम तक भी पहुँचा दी, कि पवित्रशास्त्र के अनुसार ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए मरा, और गाड़ा गया, तथा पवित्रशास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। (1 कुरिन्थियों 15:1-4)

पौलुस कुरिन्थियों के विश्वासियों को सुसमाचार के सन्देश और उनके लिए इसकी व्यापक प्रासंगिकता को स्मरण दिलाता है। उन्होंने इसे ग्रहण किया, वे इसमें स्थिर हैं, वे इसके द्वारा बचाए जा रहे हैं। जब वे पौलुस द्वारा दिए गए सुसमाचार के सन्देश को थामे रहेंगे, तो ये पवित्र और सामर्थी लाभ इनके अनुभव में प्रवाहित होंगे। कुरिन्थियों के लोग इस प्रकार की आशीषों के योग्य नहीं हैं, परन्तु सुसमाचार ख्रीष्ट में परमेश्वर के अनुग्रह की घोषणा अयोग्य लोगों के लिए करता है। कुरिन्थियों के लोगों की एकमात्र विनाशकारी विफलता उनका अविश्वास होगा। सुसमाचार के विषय में बहुत कुछ कहने के बाद, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि पौलुस ने अपनी प्राथमिकताओं में इसे “प्रथम महत्व” का स्थान प्रदान किया है।

तो फिर, सुसमाचार क्या है? सुसमाचार परमेश्वर की ओर से शुभ सन्देश है, पहली बात यह है कि “ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए मरा।” बाइबल बताती है कि परमेश्वर ने आदम को पाप रहित बनाया था, वह अच्छी सृष्टि पर अधिकार करने के योग्य था (उत्पत्ति 1)। फिर आदम परमेश्वर से अलग हो गया और वह अपने साथ हमारी समस्त प्रजाति को दोष, दुख और अनन्त विनाश में ले गया (अध्याय 3)। परन्तु परमेश्वर ने, हम जैसे विद्रोहियों के लिए जो उसके लिए पूरी तरह से अयोग्य हैं, अपने महान प्रेम में होकर, एक उत्तम आदम को भेजा, जिसने एक सिद्ध जीवन को जीया, जिसे हमने कभी नहीं जीया, और वह दोषी की मृत्यु मरा जो मृत्यु हम नहीं मरना चाहते। “ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए मरा,” इस मायने में, कि क्रूस पर, उसने हमारे अपराधों का प्रायश्चित किया जिसे हमने अपने राजा परमेश्वर के विरुद्ध किए थे। यीशु ने, हमारे बदले मरने के द्वारा, अपने लोगों के वास्तविक नैतिक दोष के प्रति परमेश्वर के सारे प्रकोप को, अपने ऊपर ले लिया। उसने किसी भी ऋण के मूल्य को शेष न रखा। उसने स्वयं ही कहा, “पूरा हुआ” (यूहन्ना 19:30)। और हम सदा तक यह कहते रहेंगे, “वध किया हुआ मेमना योग्य है” (प्रकाशितवाक्य 5:12)।

दूसरी बात यह है कि, सुसमाचार कहता है कि, “वह गाड़ा गया,” जो इस बात पर बल देता है कि यीशु की पीड़ा और मृत्यु पूर्ण रूप से वास्तविक, तीव्र और अन्तिम थी। बाइबल कहती है कि, “अतः उन्होंने जाकर क़ब्र की रखवाली करवाई तथा पहरेदार बैठाकर पत्थर पर मुहर भी लगा दी” (मत्ती 27:66)। उसे मारने के बाद, उसके शत्रुओं ने इस बात को निश्चित किया कि प्रत्येक व्यक्ति जान जाए कि यीशु वास्तव में मर गया है। हमारे प्रभु की मृत्यु न केवल निश्चित मृत्यु थी, परन्तु यह मृत्यु अपमानजनक भी थी: “उसकी क़ब्र दुष्ट मनुष्यों के साथ ठहराई गई” (यशायाह 53:9)। अपने अद्भुत प्रेम में होकर, यीशु हम पापियों के साथ पहचाना गया और पूर्णत: दुख उठाया, उसने कुछ भी नहीं रख छोड़ा। 

तीसरी बात यह है, सुसमाचार बताता है कि, “वह तीसरे दिन जी भी उठा।” कई वर्षों पहले, मैंने एस. लुइस जौनसन को इसे इस प्रकार कहते हुए सुना: पुनरुत्थान, ख्रीष्ट के “पूरा हुआ” कथन के प्रति परमेश्वर का आमीन है। यीशु “हमारे धर्मी ठहराए जाने के लिए जिलाया भी गया” (रोमियों 4:25)। उसका क्रूस पर हमारे पापों के लिए किया गया प्रायश्चित का कार्य सफल हुआ, और ऐसा होना ही था। इससे बढ़कर, अपने पुनरुत्थान के द्वारा ख्रीष्ट “सामर्थ्य के साथ परमेश्वर का पुत्र घोषित हुआ,”—अर्थात्,वही हमारा विजयी मसीहा है जो हमेशा तक राज्य करेगा (रोमियों 1:4)। केवल जी उठा ख्रीष्ट ही हम से कह सकता है, “भयभीत न हो; मैं ही प्रथम, अन्तिम और जीवित हूं; मैं मर गया था और देख, मैं युगानुयुग जीवित हूं, और मेरे पास मृत्यु और अधोलोक की कुंजियाँ हैं” (प्रकाशितवाक्य1:17-18)। जीवित ख्रीष्ट ने मृत्यु को हरा दिया है और अब वह हमारे लिए स्थान तैयार कर रहा है—नया आकाश और नई पृथ्वी, जहाँ उसके लोग सदा के लिए आनन्दपूर्वक उसके साथ रहेंगे।

यह हम पापियों के प्रति परमेश्वर के महान अनुग्रह का सुसमाचार है। इससे अधिक जो कुछ भी कहा जाए वह हमें केवल यीशु ख्रीष्ट के महान कार्य के विषय में और अधिक बताता है। आइए हम उस वचन को दृढ़तापूर्वक थामे रहें, जो हमें प्रचार किया गया है। यदि हम इस सुसमाचार पर विश्वास करते हैं, तो हम व्यर्थ में विश्वास नहीं कर सकते हैं।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।

रे ऑर्टलैण्ड

रे ऑर्टलैण्ड

डॉ. रे ऑर्टलैण्ड, नैशविल टेनेसी में इमैनुअल चर्च के वरिष्ठ पास्टर हैं। रीनिवल मिनिस्ट्रीज़ के अध्यक्ष और व्हेन गॉड कम्स टू चर्च सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं।