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3 नवम्बर 2026यीशु को अन्तिम आदम क्यों कहा जाता है?
जब आदम पाप में गिर गया, तब उसने स्वयं को और अपनी संतान को कार्य की वाचा की अपेक्षाओं को पूरा करने के योग्य नहीं रहने दिया। परमेश्वर ने आदम की बुलाहट को नए सिरे से नहीं लिखा, रन् उसे पूरा करने के लिए व्यक्ति को भेजा जिसने उसे पूर्णतः और विश्वासयोग्य रीति से पूरा किया—अर्थात् यीशु, जो अन्तिम आदम है। प्रेरित पौलुस अनेक स्थानों पर आदम और यीशु को साथ-साथ प्रस्तुत करता है, जिससे हम देख सकें कि वे दोनों अपनी-अपनी वाचा (या संघीय) के प्रतिनिधि-प्रधान हैं: “क्योंकि जैसे एक मनुष्य की आज्ञा न मानने के द्वारा बहुत से लोग पापी ठहराए गए, वैसे ही एक मनुष्य की आज्ञाकारिता के द्वारा बहुत से लोग धर्मी ठहराए जाएँगे” (रोमियों 5:19)। आदम और यीशु के प्रतिनिधिक कार्य उन सबकी अन्तिम स्थिति को निर्धारित करते हैं जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं।
पौलुस पुनरुत्थान की अपनी व्याख्या में भी इसी सत्य को स्पष्ट करता है: “क्योंकि जैसे एक मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई, वैसे ही एक मनुष्य के द्वारा मरे हुओं का पुनरुत्थान भी आया। क्योंकि जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसे ही ख्रीष्ट में सब जीवित किए जाएँगे” (1 कुरिन्थियों 15:21–22)। जो लोग वाचागत रूप से आदम के साथ एक हैं, वे सब मृत्यु के अधीन हैं; और जो लोग वाचागत रूप से यीशु के साथ एक हैं, वे सब जीवन पाते हैं। पौलुस 1 कुरिन्थियों 15 में आगे चलकर इसी सत्य को और भी विस्तार से स्पष्ट करता है:
इस प्रकार लिखा है, “पहला मनुष्य आदम जीवित प्राणी बना”; अन्तिम आदम जीवन देनेवाली आत्मा बना। परन्तु जो आत्मिक है, वह पहले नहीं, बल्कि जो प्राकृतिक है वही पहले है; उसके बाद जो आत्मिक है। पहला मनुष्य पृथ्वी से, अर्थात् मिट्टी का बना हुआ था; दूसरा मनुष्य स्वर्ग से है। जैसा मिट्टी का मनुष्य था, वैसे ही वे भी हैं जो मिट्टी के हैं; और जैसा स्वर्गीय मनुष्य है, वैसे ही वे भी हैं जो स्वर्गीय हैं। और जैसे हमने मिट्टी के मनुष्य का स्वरूप धारण किया है, वैसे ही हम स्वर्गीय मनुष्य का भी स्वरूप धारण करेंगे। (1 कुरिन्थियों 15:45–49)
पौलुस आदम की सृष्टि के विषय में उत्पत्ति 2:7 का उद्धरण देता है, जिससे वह यह दिखाता है कि यद्यपि आदम जीवित प्राणी बना, तौभी वह केवल प्राकृतिक सन्तान ही उत्पन्न कर सकता था। उसके पतन और पृथ्वी की मिट्टी में लौटा दिए जाने के कारण, आदम केवल ऐसी सन्तान उत्पन्न कर सकता था जो अन्ततः मिट्टी में ही लौट जाती है। इसके विपरीत, अन्तिम आदम, अर्थात् यीशु, स्वर्ग से है और आत्मिक है; अर्थात् वह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण और पवित्र आत्मा के द्वारा विशेष रूप से चिन्हित है। जो लोग वाचागत रूप से उसके साथ एक हैं, वे उसके स्वर्गीय स्वरूप में सहभागी होंगे। अन्तिम आदम के रूप में यीशु ने अपने स्वर्गीय पिता की आज्ञा का पूर्णतः, व्यक्तिगत रूप से, और अन्तिम रूप से पालन किया। इसलिए वह जीवन देने वाला आत्म बने। वह पवित्र आत्मा के कार्य को सक्रिय करता है, जो निकलकर ख्रीष्ट की दुल्हन, अर्थात् कलीसिया—अन्तिम हव्वा—को एकत्र करता है।
बाइबल यीशु को अन्तिम आदम, आज्ञाकारी पुत्र के रूप में प्रस्तुत करती है, जो परमेश्वर के आज्ञा न माननेवाले पुत्रों—आदम और इस्राएल—के स्पष्ट विपरीत खड़ा है। स्मरण कीजिए कि आदम परमेश्वर का पुत्र था (लूका 3:38; तुलना करें, उत्पत्ति 5:1–4), फिर भी उसने निषिद्ध फल लेकर और खाकर परमेश्वर के तुल्य होने का प्रयत्न किया। परन्तु यीशु ने, जिसने परमेश्वर के तुल्य होने को पकड़कर रखने योग्य वस्तु नहीं समझा, मनुष्य बनकर इस संसार में आगमन किया, स्वयं को दीन किया, और यहाँ तक कि क्रूस पर मृत्यु सहने तक आज्ञाकारी बना रहा (फिलिप्पियों 2:5–11)।
इसी प्रकार, इस्राएल भी परमेश्वर का पुत्र था (निर्गमन 4:22; होशे 11:1), परन्तु वह हठी और आज्ञा न माननेवाला सिद्ध हुआ। पवित्र आत्मा इस्राएल को जंगल में ले गया, जहाँ लोगों ने भोजन की कथित कमी के कारण आज्ञा का उल्लंघन किया। परन्तु जब पवित्र आत्मा यीशु को जंगल में ले गया और शैतान ने उसकी तीन बार परीक्षा ली, तब वह आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य बना रहा। जैसा कि कलीसिया के प्राचीन अगुवे ने लूका के सुसमाचार पर अपनी टीका में लिखा है, “यह उचित है कि यह लिखा गया है कि पहला आदम जंगल में स्वर्ग से निकाल दिया गया था, जिससे तुम देख सको कि दूसरा आदम जंगल से स्वर्ग में लौट आया।” अम्ब्रोस इस सत्य पर और अधिक बल देते हुए कहते हैं, “आदम ने वृक्ष के द्वारा मृत्यु लाई; ख्रीष्ट ने वृक्ष के द्वारा जीवन प्रदान किया।” यीशु उस नई सृष्टि का शुभारम्भ करता है, जिसका आरम्भ आदम को करना था। जहाँ आदम कार्य की वाचा में असफल हुआ, वहीं यीशु अनुग्रह की वाचा के द्वारा सफल हुआ और उन सबके लिए उद्धार लाया जो उस पर भरोसा करते हैं।
सोलहवीं शताब्दी के कवि जॉन डन (John Donne) के शब्दों में:
हम मानते हैं कि स्वर्गोद्यान और कलवरी,
ख्रीष्ट का क्रूस और आदम का वृक्ष, एक ही स्थान पर खड़े थे;
हे प्रभु, दृष्टि कीजिए और मुझमें दोनों आदमों को मिलते हुए पा;
जैसे पहले आदम का पसीना मेरे मुख को घेरे रहता है,
वैसे ही अन्तिम आदम का लहू मेरी आत्मा को अपने आलिंगन में ले ले।
जब तक हम पहले कार्य की वाचा को समझ नहीं लेते, तब तक अनुग्रह की वाचा को भी सही रीति से नहीं समझ सकते। इसी प्रकार, जब तक हम पहले आदम के कार्य को नहीं समझते, तब तक हम अन्तिम आदम के कार्य को भी नहीं समझ सकते।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

