21 अगस्त 2025
यह बात अनियमित रूप से परन्तु बार-बार घटती है: दु:ख हमारे अन्यथा सुखद जीवन में घुस आता है और उसे पुनः व्यवाधित कर देता है। शोकपूर्ण अनुभवों की यही अवांछित तरीका है। वे बिन बुलाए आ जाते हैं, प्रभावित लोगों को शोकाकुल, दु:खी और क्षीण महसूस कराते हैं। ये दुखद प्रावधान वास्तविक हानि और क्षति लाते हैं।
