गलातियों 3:28 - लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
1 कुरिन्थियों 13:13
14 जून 2022
फिलिप्पियों 4:13
21 जून 2022

गलातियों 3:28

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का आठवा अध्याय है: उस पद का अर्थ वास्तव में क्या है?

गलातियों 3:28 में पौलुस के कथन को विभिन्न त्रुटिपूर्ण विचारों का समर्थन करने के लिए उद्धृत किया गया है, परन्तु सामान्यतः दो रीतियों में इसका त्रुटिपूर्ण अर्थ निकाला जाता है। प्रथम यह कि पौलुस को इस रीति से त्रुटिपूर्वक समझा जाता है कि वह कह रहा हो कि सभी मानवीय भेद मिटा दिए गए हैं। दूसरा पौलुस जो कह रहा है उसके महत्व को कम समझना है।

प्रथम, कुछ लोग गलातियों 3:28 के आधार पर समानतावाद (egalitarianism), विपरीतलिंगवाद (transgenderism), व्यापक सांस्कृतिक समावेश (comprehensive cultural assimilation), जातीय उपेक्षा (ethnic indifference), वर्गहीन समाज (class societies), और बहुत कुछ की रक्षा करते हैं। परन्तु वे विचार पौलुस के बिन्दु के लिए अप्रासंगिक हैं। जिस समतुल्यता का समर्थन वह कर रहा है वह उद्धार के सन्दर्भ में है; यह सभी मानवीय भेदों को अनदेखा करना नहीं है। वास्तव में, कुछ भेद सृष्टि की रचना के समय स्थापित किए गए थे—जैसे सब्त और सामान्य दिनों के मध्य (उत्पत्ति 2:2-3; निर्गमन 16:22-26; मरकुस 7:19), श्रम और विश्राम के मध्य (उत्पत्ति 2:15; 2 थिस्सलुनीकियों 3:10; याकूब 5:4), और लैंगिग भूमिकाओं में (उत्पत्ति 2:18; 1 कुरिनन्थियों 11:3-16) । यह वास्तविकता पौलुस द्वारा उल्लेखित तीन श्रेणियों की सामान्य स्थायी वैधता को बताती है: लैंगिक भूमिकाएँ (पुरुष-स्त्री), सामाजिक-श्रम भेद (दास-स्वतन्त्र), और जातीयता (यहूदी-यूनानी)।

पुरुष-स्त्री । ख्रीष्ट का कार्य लैंगिक भूमिकाओं को निरस्त नहीं कर देता है। उदाहरण के लिए, गलातियों 3:28 और इफिसियों 5:22 के मध्य कोई विरोधाभास नहीं है, क्योंकि एक का सम्बन्ध उद्धार से है जबकि दूसरे का सम्बन्ध परिवार में लैंगिक भूमिकाओं से है। कुछ भेद कलीसिया में भी बने रहते हैं, जैसे कि वह भेद जो केवल योग्य पुरुषों को ही कलीसिया के पदों के निर्वाह की अनुमति देता है (1 तीमुथियुस 2:12-15)।

दास-स्वतन्त्र।  फिलिमोन के लिए पौलुस का निवेदन सामाजिक और श्रमिक भेदों को मानता है, फिर भी वह इन अन्तरों पर सुसमाचार को लागु करता है, फिलिमोन को यह स्मरण कराते हुए कि वह और उनेसिमुस श्रेष्ठतर-निम्नतर सम्बन्ध में थे, परन्तु सर्वप्रथम और मुख्यतः वे ख्रीष्ट में एक किए गए भाई हैं (1 कुरिन्थियों 12:13 भी देखें‌)।

यहूदी-यूनानी।  जातीयता और संस्कृति प्रावधानिक रूप से आदेशित हैं (प्रेरितों के काम 17:26 देखें), यद्यपि वे सृष्टि द्वारा स्थापित संस्थाएँ नहीं हैं। हम में से किसी ने अपनी उस जातियता या संस्कृति को नहीं चुना है जिसमें हमारा जन्म हुआ है, फिर भी ख्रीष्ट का छुटकारा परमेश्वर की प्रावधानिक बुद्धि का खण्डन नहीं करता।

पवित्रशास्त्र के सन्दर्भ और अन्य खण्डों से, हम जानते हैं कि पौलुस यह नहीं कह रहा है कि सारे भेद शून्य हो जाते हैं। फिर भी, एक समान और विपरीत त्रुटि है, जो कि मसीही एकता की हानि करते हुए शारीरिक भेदों को प्रबल करने की है। गलातियों में, पौलुस नष्ट कर देने वाले अन्तर जो कि ख्रीष्ट ने जो पूरा किया है उसमें बाधा डालते हैं उनकी तुलना में बनाए रखने वाले अन्तरों के प्रति कम चिन्तित है (1 कुरिन्थियों 12:13; कुलुस्सियों 3:11 देखें)। यहीं कारण है कि छुटकारे का इतिहास महत्वपूर्ण है।

“समय के पूरे होने” से पूर्व (गलातियों 4:4), यहूदी और अन्यजातियों के मध्य एक दीवार थी (इफिसियों 2:14)। इस्राएल को “सब जातियों से बढ़कर” (व्यवस्थाविवरण 10:15) चुना था “निज प्रजा” (7:6) के रूप में। किन्तु, जातियों को, “अपने-अपने मार्ग पर चलने” के लिए छोड़ दिया था (प्रेरितों के काम  14:16)। ख्रीष्ट ने एक ऐसे राज्य का उद्घाटन किया जिसने भविष्यद्वाणियों को पूरा किया कि परमेश्वर जातियों को अपना उत्तराधिकार बनाएगा (भजन 2:8; 1 राजा 8:41-43)। अपनी सेवकाई में भी, ख्रीष्ट ने जातियों के पूर्ण समावेश में तब तक विलम्ब किया जब तक कि उसका कार्य न पूरा हो गया (मत्ती 10:5; 15:24)। यद्यपि यह पहले बता दिया गया था, यह समावेश चकित कर देने वाला था; इसलिए प्रेरितों के काम में अन्यजातियों और खतना के विषय में भ्रम दिखता है (प्रेरितों के काम 10-11; 15)। यह भ्रम गलातिया की कलीसिया में फैल गया, जहाँ यहूदावादी खतना का एक अतिरिक्त साधन के रूप में समर्थन कर रहे थे जिसके द्वारा कोई अब्राहम की सन्तान बनाया जाता है। परन्तु खतने का स्थान बपतिस्में ने ले लिया है—ख्रीष्ट के साथ मिलन का चिन्ह और मुहर (गलातियों 3:27)। तब, ख्रीष्ट के साथ एक होने के लिए क्या आवश्यक है? क्या हमें अब्राहम की संतान बनाता है? यह जातीयता (यहूदी या अन्यजाति), खतना (पुरुष या स्त्री), या सामाजिक स्थिति (स्वतन्त्र या दास) नहीं है। केवल विश्वास हमें अब्राहम के वंश से जोड़ता है (पद 16, 22) और हमें पुत्र बनाता है (पद 26)। ख्रीष्ट के साथ हमारे मिलन की के द्वारा, हम ख्रीष्ट के लाभों में सन्युक्त भागी हैं—कोई भेद नहीं, कोई श्रेष्ठता नहीं, किसी दूसरे से श्रेष्ठ नहीं। यदि कोई ख्रीष्ट पर विश्वास करता है, भले ही उसका लिंग, वर्ग, जाति, या आयु कुछ भी हो, वह—अन्य सभी पवित्र लोगों के साथ-साथ—ख्रीष्ट यीशु में है और इसलिए उन सभी लाभों का अधिकारी है जो उस मिलन से प्राप्त होता है।

ख्रीष्ट के साथ मिलन, कुछ भेदों के बने रहने के बाद भी, सर्वप्रथम महत्व रखता है। विश्वास प्राथमिक है क्योंकि यह अकेला लोगों को—चाहे बाहरी रूप से वह कितने भी भिन्न हों— “प्रतिज्ञा के अनुसार” सह उत्तराधिकारी के रूप में एकजुट करता है (पद 29)। इस जीवन में कोई भी अन्य मानवीय भेद इसकी तुलना में नगण्य है। हाँ, सांस्कृतिक भेद भी, भले ही वे कितने ही सुन्दर हों, परमेश्वर के लोगों द्वारा साझा किए मिलन की तुलना में तुच्छ है। फिर, यह माना जाना चाहिए कि, मसीही जो बाहरी सम्बन्धों में केवल कुछ ही समानता साझा करते हैं, वे एक ऐसी एकता का आनन्द लेते हैं जो ऐसी विशेषताओं पर आधारित अपेक्षित एकता से अत्याधिक रूप से श्रेष्ठ है।

कलीसिया में भेद, जब तक कि वे विभाजनकारी न हों, अनुमतिप्राप्त हैं, जबकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की अनुमति नहीं है। मसीहियों के मध्य संगति को बाधित करने के लिए भेदों को अनुमति देना उस अवरोध को पुनः निर्मित करना है जिसे ख्रीष्ट ने तोड़ दिया था। जब हम मसीहियों को बाहरी रूप में समझते हैं, जब हम एक दूसरे को शरीर के अनुसार समझते हैं (2 कुरिन्थियों 5:16), हम अवरोध को पुनः निर्मित करते हैं। परमेश्वर सहायता करे, कि यह हमारे विषय में कभी न कहा जाए।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया
ऐरन एल. गैरियट्ट
ऐरन एल. गैरियट्ट
रेव. ऐरन एल. गैरियट्ट (@AaronGarriott) टेब्लटॉक पत्रिका के प्रबन्धक सम्पादक हैं, सैन्फर्ड, फ्लॉरिडा में रेफर्मेशन बाइबल कॉलेज में निवासी सहायक प्राध्यापक हैं, तथा प्रेस्बिटेरियन चर्च इन इनडिया में एक शिक्षक प्राटीन हैं।