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यहूदा का राजदण्ड

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का तीसरा अध्याय है: प्रतिज्ञात मसीहा

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि पुराने नियम का राजत्व दाऊद के राजतंत्र के उदय के साथ अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच जाता है। इतना ही स्पष्ट है कि राजत्व की प्रतिज्ञा दाऊद के साथ आरम्भ नहीं हुई थी। यह इब्राहीम तक पीछे जाता है। स्मरण करें कि यहोवा ने इब्राहीम से प्रतिज्ञा की थी कि “तुझ से राजा उत्पन्न होंगे” (उत्पत्ति 17:6), एक प्रतिज्ञा जिसे याकूब के साथ दोहराई गई (35:11)। यह राजत्व की प्रतिज्ञा उत्पत्ति 49 अध्याय में उसके पुत्रों के लिए याकूब के अन्तिम शब्दों में एक प्रमुख रूप लेता है, जहाँ पर वह यहूदा पर प्रभुत्व की आशीष की घोषणा करता है। आइए हम विचार करें याकूब की इस आशीष पर और इस बात पर कि कैसे इसने परमेश्वर के लोगों के लिए राजत्व के उदय की आशा की।

पद 8 में, यहूदा को प्रशंसा का पात्र बनाया जाता है और उसे विश्वव्यापी प्रभुत्व दिया जाता है। 9 पद यहूदा के शासन के इस चित्रण को आगे बढ़ाता है उसे एक सिंह के बच्चे के रूप में स्पष्ट रूप से चित्रित करते हुए, जिसने अपने शिकार का शिकार किया है, उसे मार कर अपनी मांद में लौट आया है, और सामर्थ्य में विश्राम करता है जहाँ कोई भी उसे छेड़ने का दुस्साहस नहीं करता है।

यह पद 10 के चित्ताकर्षक चित्रों की ओर जाता है। याकूब राजत्व के दो प्रतीकों  को यहूदा के साथ जोड़ता है: एक “राजदण्ड” (गिनती 24:17; यशा. 11:4; भजन 45:6; ज़कर्याह 10:11) और एक “शासक की लाठी” (गिनती 21:18; भजन 60:7)। “उसके पैरों के बीच से” वाक्यांश पुरुष प्रजनन अंग के लिए एक शिष्टोक्ति है (न्यायियों 3:24; 1 शमूएल 24:3; यशायाह 7:20) और इस प्रकार यहूदा के वंशज का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरे शब्दों में, एक यहूदा वंशी सदैव परमेश्वर के लोगों का राष्ट्रीय सेनापति होंगे। यह “शीलो के आने तक” सत्य बना रहेगा (उत्पत्ति 49:10)।

“शीलो” व्यक्ति ने युगों से विद्वानों की रुचि आकर्षित किया है, और विभिन्न व्याख्याएं प्रस्तावित की गई हैं। कुछ लोग शि  को एक सम्बन्धवाचक सर्वनाम के रूप में समझते हैं और लोह  को “उसको” के रूप में समझते हैं; अतः, “जब तक वह न आए जिसका [राजदण्ड/शासक की लाठी] है।” अन्य लोग  को दुर्लभ इब्रानी संज्ञा शेय  के रूप में  देखते हैं, जिसका अर्थ “उपहार” है; अतः, “जब तक उसके [यहूदा] पास उपहार न आ जाए।” एक तीसरा विकल्प यहूदा के एक उत्कृष्ट भावी पुत्र के व्यक्तिगत नाम के रूप में “शीलो” को समझना है। अन्य स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए हैं, परन्तु ये तीनों सबसे लोकप्रिय विकल्पों का प्रतिनिधित्व करते हैं। चाहे जो भी दृष्टिकोण, ये तीनों समान विषय का साझा करते हैं: यहूदा के वंश में एक उत्कृष्ट व्यक्ति अपना प्रभुत्व स्थापित करेगा जो इस्राएल तक सीमित नहीं होगा; किन्तु, “राज्य राज्य के लोग उसकी आज्ञा मानेंगे” (पद 10)।

यद्यपि इनमें से कोई भी मसीहाई विकल्प सम्भव हैं, मैं उस दृष्टिकोण का समर्थन करता हूँ जो “शीलो” को एक व्यक्तिगत नाम के रूप में देखता है। इब्रानी मूल श-ल-ह  पुराने नियम में प्रायः आता है, जिसका अर्थ है “आराम, शान्त, शान्ति।” अतः, “शीलो” एक ऐसा व्यक्ति है जो सार के रूप में शान्ति का राजकुमार है (यशायाह 9:6 देखें)। उस शान्तिपूर्ण आनन्द की समृद्धि का चित्र जिसे वह लाता है, उत्पत्ति 49:11-12 में बना रहता है। शीलो का विश्वव्यापी शासन का परिणाम उसके राज्य की समृद्धि में होता है, जहाँ पर दाखलताएँ इतनी बहुतायत में होती हैं कि गदहे बाड़े के स्थान पर उनसे बांधे जा सकते हैं। दाखलता को, जो लताओं का फल है, अब विशेष अवसरों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता नहीं है। शीलो के राज्य में, यह इतना प्रचुर मात्रा में है कि इसका उपयोग दैनिक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसे कपड़े धोने के लिए (पद 11)। वास्तव में, आनन्द के पेय, जैसे कि दाखमधु और दूध, सभी के आनन्द लेने के लिए अति प्रचुर मात्रा में होंगे (12 पद)।

परन्तु, शान्ति और समृद्धि का यह चित्र बहुत उच्च मूल्य के फलस्वरूप आता है—अर्थात, स्वयं शीलो का बलिदान के। स्थल में इस प्रकार के कार्य का उल्लेख पाया जाता है। एक “दाख के लहू” का चित्रण है (पद 11; यशायाह 63:2 देखें)। दूसरा चित्रण “गदहे” का है, जिसे प्राचीन जगत में प्रायः विश्वायोग्यता की शपथ की सम्पुष्टि में उपयोग किया जाता है। इस सन्दर्भ में इस शब्द का प्रयोग यह बताता है कि शीलो अपने मूल्य पर शान्ति लाएगा (उत्पत्ति 15 देखें)। इस “गदहे” का उल्लेख इसके समान ज़कर्याह 9:9 में किया गया है, जहाँ मसीहाई राजा इस गदहे पर सवार होकर यरूशलेम नगर में प्रवेश करता है। ज़कर्याह 9:9 का महत्व निस्संदेह है, क्योंकि यह यीशु के यरूशलेम नगर में प्रवेश में पूरा होता है (मत्ती 21:5)। इस प्रकार, ख्रीष्ट ने एक ऐसे पशु पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया जो उसके आगामी बलिदान का प्रतिनिधित्व करता था।

यद्यपि उत्पत्ति 49:8-12 उसके पुत्र यहूदा के लिए याकूब की अन्तिम आशीष का अभिलेख है, छुटकारे के इतिहास में इसकी स्वीकृति इसे एक भव्य भविष्यवाणी के रूप में चित्रित करता है जो यीशु ख्रीष्ट में अपनी अन्तिम पूर्ति को पाता है। यह बताता है कि राजसी अधिकार यहूदा और उसके परिवार के साथ जुड़ा होगा। यह एक चरम बिन्दु पर पहुँच जाएगा जब उसका एक पुत्र वैश्विक शान्ति और समृद्धि स्थापित करने के लिए आएगा। यद्यपि यहूदिया के राजाओं, जैसे दाऊद और सुलेमान, द्वारा शान्ति स्थापित की गई थी, उनका शासन इसे सार्वभौमिक रूप से स्थापित नहीं कर सका जहाँ “राज्य राज्य के लोग उसकी आज्ञा मानेंगे” (पद 10), न ही वे एक राज्य समृद्धि ला सके जो युगान्तिक बहुतायत प्रदान करती थी (पद 11-12)। वे यहूदा के एक महान पुत्र, शान्ति के सच्चे राजकुमार का एक चित्र थे, जो अपने गौरवशाली राज्य का पूर्ण आशीष लाता है। यीशु वह महान यहूदा वंशी पुत्र है, वह मसीहाई शीलो जिसकी मृत्यु ने “परमेश्वर के साथ शान्ति” स्थापित की (रोमियों 5:1)। वह अपने पिता के साथ रहने के लिए चढ़ गया, परन्तु “स्वर्ग की सेनाओं के साथ”  वापस आएगा (प्रकाशितवाक्य 19:14) “लहू में डूबा हुआ वस्त्र” पहनकर (पद 13) उन सभी को पराजित करने के लिए जो उसका विरोध करने का दुस्साहस करते हैं। ख्रीष्ट के साथ हमारे मिलन में, हम “ख्रीष्ट के संगी वारिस” हैं (रोमियों 8:17) और हम उसकी वापसी की प्रतीक्षा करते हैं जब वह सच्ची स्वर्गीय देश को स्थापित करेगा और हम “मेम्ने के खून में” धोए गए श्वेत वस्त्र पहनेंगे (प्रकाशितवाक्य 7:14)।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
पीटर वाई. ली
पीटर वाई. ली
डॉ. पीटर वाई. ली वाशिंग्टन डी. सी. में रिफॉर्मड थियोलॉजिकल सेमिनेरी में पुराने नियम के प्राध्यापक तथा विद्यार्थियों के अध्यक्ष हैं।