अपने बच्चों और जीवनसाथी से प्रेम करें | लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
अपनी कलीसिया में भाग लीजिए
7 जून 2021
हमें दिखाइए कि कैसे अच्छी रीति से पूरा करें
10 जून 2021

अपने बच्चों और जीवनसाथी से प्रेम करें

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का सातवां अध्याय है: पीढ़ी से पीढ़ी

परमेश्वर के अनुग्रह से, मैं और मेरी पत्नी विवाह के पचासवें वर्ष में हैं। हमारे वयस्क बच्चें उनके हृदयों की चरवाही करने के हमारे चूकने वाले प्रयासों से बचाए गए। अब, हम आनन्द से उन्हें हमारे पोते-पोतियों के हृदयों की चरवाही करते हुए देखते हैं। मैंने सीखा है: विवाह कभी-कभी कठिन होता है परन्तु प्रायः मधुर होता है। बच्चों का पालन-पोषण भय युक्त है परन्तु आनन्द से भरा हो सकता है। हमारा स्वर्गीय पिता सदा धैर्यवान, दयालु और विश्वासयोग्य है। मैं अभी भी और बहुत कुछ सीख रहा हूँ, और यहाँ कुछ चेतावनियां हैं जो उस सीख से निकलती हैं।

जितना आप अपने परिवार से प्रेम करते हैं उससे अधिक ख्रीष्ट से प्रेम करें।  इस्राएल के पड़ोसियों ने मोलेक के लिए बच्चों की बलि दी। हमारे पड़ोसी प्रायः व्यवसायिक उन्नति, व्यक्तिगत पूर्ति, या अन्य “मूर्तियों” के लिए जीवनसाथी और बच्चों का बलिदान कर देते हैं। ख्रीष्टिय लोग हमारे विशैले सांस्कृतिक वातावरण के प्रति प्रतिक्रिया कर सकते हैं और वैवाहिक और माता-पिता के प्रेम—परमेश्वर के अच्छे उपहार—को हमारी अपनी मूर्तियों में बदल सकते हैं। परन्तु यीशु कहता है, “जो मुझ से अधिक अपने माता या पिता से प्रेम करता है, वह मेरे योग्य नहीं, जो मुझ से अधिक अपने पुत्र या पुत्री से प्रेम करता है, वह मेरे योग्य नहीं” (मत्ती 10:37)।

यदि आप अपने जीवनसाथी या बच्चों से सबसे अधिक प्रेम करते हैं तो आप उनसे प्रेम अच्छे से नहीं कर सकते। मूर्तियों के रूप में, आपके सबसे निकट और प्रिय लोग, आपकी भक्ति और निर्भरता का भार नहीं उठा सकते हैं। केवल जब आपका हृदय झुक जाता है और आपकी आशा यीशु पर टिकी होती है, तो आप अपने प्रियजनों से परमेश्वर की अपेक्षा के अनुसार प्रेम करने के लिए अनुग्रह प्राप्त करेंगे।

अपने परिवार से स्वयं से अधिक प्रेम करें।  आत्म-केन्द्रियता विकृत मानव हृदयों की स्वतः पाई जाने वाली स्थिति है, यहां तक ​​कि उनमें भी जिन्हें परमेश्वर के आत्मा द्वारा पुनर्निर्मित किया जा रहा है। अपने स्वयं की नीतियों का अनुसरण करने के तत्परता से दूसरे लोगों के लिए अपने जीवन को बलिदान करने के लिए लिए श्रम करना पड़ता है, जैसा कि यीशु ने हमारे लिए किया था (1 यूहन्ना 3:16)। इस प्रकार के बलिदान में न केवल कम होने वाली चरम स्थित (पति या पत्नी या बच्चों को शारीरिक वार से बचाना) सम्मिलित है, परन्तु जीवन के दैनिक विकल्प भी कि हम पैसे, समय और शक्ति कैसे निवेश करते हैं (पद 17)।

विशेषकर, अपने हृदय की चौकसी करें। नीतिवचन 6:20-35 हमारे सामाजिक वातावरण के लिए समय पर परामर्श देता है जिसमें अतृप्त आवश्यकताएं और आकर्षण की नई भावनाएँ पुरानी, ​​​​असहज प्रतिज्ञाओं पर प्रबल हो जाती हैं। पति, अपनी थकी हुई पत्नी की तुलना उस सहकर्मी से करना बन्द करें जो आपकी हर अन्तर्दृष्टि पर अपनी प्रशंसा देती है। पत्नी, बातों में आसपास के अति लिपटे हुए पिताओं के सुनने वाले कानों से सावधान रहें जिनकी सहानुभूति आपके असावधान पति से अधिक है। स्मरण रखें, आप अपने से परे प्रेम के भण्डार से प्रेम को भर सकते हैं: “हम प्रेम करते हैं, क्योंकि पहिले उस ने हम से प्रेम किया” (1 यूहन्ना 4:19)।

गति निर्धारित करें।  प्रेम हमारे प्रियजनों के लिए सर्वश्रेष्ठ चाहता है। इसके लिए अनुशासन अनिवार्य है। “प्रभु की ताड़ना को हल्की बात न समझ। . . . क्योंकि प्रभु जिससे प्रेम करता है, उसकी ताड़ना भी करता है” (इब्रानियों 12:5–6)। पौलुस पिताओं से “प्रभु की शिक्षा और ताड़ना में” बच्चों का पालन-पोषण करने का आग्रह करता है (इफिसियों 6:4)। ये स्थल तीन सत्य दिखाते हैं: (1) वास्तविक प्रेम ताड़ना देता है। ना कहने में विफलता प्रेम का नहीं परन्तु उदासीनता, निष्क्रियता या आत्म-सेवा करने वाली भीरुता का प्रतीक है। (2) परमेश्वरीय अनुशासन प्रबल होने की इच्छा से नहीं, परन्तु अपने जीवनसाथी और बच्चों की भलाई के लिए प्रेमपूर्ण लालसा से प्रवाहित होता है। (3) जब हम स्वयं को प्रभु के अनुशासन के प्रति समर्पित करते हैं, तो हम दूसरों तक प्रभु के प्रेमपूर्ण अनुशासन को बढ़ा सकते हैं।

अनुग्रह से जिएं।  जब हम परमेश्वर के अनुग्रह से परिवर्तित हो रहे हैं, तो हम घण्टे-दर-घण्टे इस अनुग्रह में रहकर एक-दूसरे से और अपने बच्चों से प्रेम कर सकते हैं। परमेश्वर आपका सबसे बुरा पहलू जानता है और फिर भी आपको प्रेम में स्वीकार करता है। उसका अनुग्रह आपको अपनी पत्नी, अपने पति, अपने बच्चों के सामने स्वयं को नम्र करने के लिए स्वतंत्र करता है; अपने पाप और असफलता को स्वीकार करने के लिए; और क्षमा मांगने के लिए। और हम अनुग्रह से जीते हैं जब हम धैर्यपूर्वक दूसरों की विफलताओं और अपराधों को सहते हैं, प्रतिशोध को और ईर्ष्या को नकारते हुए।

कलीसिया से प्रेम करें।  अपने जीवन साथी और बच्चों से प्रेम करने का अर्थ है उन्हें यह दिखाना कि हम कलीसिया से क्यों प्रेम करते हैं। दुख की बात है, कि कुछ विश्वासियों की “परिवार मूर्तिपूजा” का एक लक्षण न केवल परिवारों को हमारी बढ़ती हुई मूर्तिपूजक संस्कृति के प्रभाव से परन्तु ख्रीष्ट की देह की सहभागिता से अलग करने का झुकाव है। ख्रीष्ट ने अपनी कलीसिया को आत्मिक वरदान दिए जो हमें एक साथ परिपक्वता की ओर बढ़ने में  सहायता करते हैं (इफिसियों 4:11-16)। परमेश्वर ने माता-पिता के लिए अपने निर्देशों को (व्यवस्थाविवरण 6:5–9; इफिसियों 6:4) अपने पूरे लोगों को सम्बोधित प्रलेखों में सन्निहित किया: “हे इस्राएल, सुन” (व्यवस्थाविवरण 6:4) और “इफिसुस के संत” (इफिसियों 1:1)। हम अपने जीवनसाथी और बच्चों से उत्तम रीति से तब प्रेम करते हैं जब हम उन्हें ख्रीष्ट की कलीसिया के प्रति अपने प्रेम को “पकड़ने” में सहायता करते हैं।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
डेनिस ई. जॉनसन
डेनिस ई. जॉनसन
डॉ. डेनिस ई. जॉनसन वेस्टमिंस्टर सेमिनरी कैलिफोर्निया में व्यावहारिक ईश्वरविज्ञान के सेवामुक्त प्रोफेसर हैं, और डेटन, टेनेसी में वेस्टमिंस्टर प्रेस्बिटेरियन चर्च के सहायक पास्टर हैं। वे कई पुस्तकों के लेखक हैं, जिनमें वॉकिंग विद जीज़स थ्रू हिज़ वर्ड और हिम वी प्रोक्लेम सम्मिलित है।