राई के बीज और ख़मीर का दृष्टान्त - लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
दक्ष कहानीकार
23 नवम्बर 2021

राई के बीज और ख़मीर का दृष्टान्त

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का दूसरा अध्याय है: यीशु के दृष्टान्त

पृथ्वी पर उसकी सेवकाई के आरम्भ से ही यीशु की शिक्षा में परमेश्वर का राज्य का एक महत्वपूर्ण स्थान था (मत्ती 4:17; मरकुस 1:15; लूका 4:43)। उसने घोषित किया कि उसका पृथ्वी पर आने का अर्थ है कि परमेश्वर का राज्य निकट है। वह अपने श्रोताओं के मध्य में परमेश्वर के राज्य को उद्घाटित कर रहा था। इस उद्घाटन के प्रदर्शन और साथ आश्चर्यकर्म और शिक्षा भी थी। उसकी शिक्षा ने भिन्न-भिन्न रूप लिए, परन्तु उनमें से मुख्य दृष्टान्त थे, जिसका उसने प्रयोग अपने श्रोताओं को राज्य के स्वरूप के विषय में कुछ सिखाने के लिए किया। राई के बीज (मत्ती 13:31-32; मरकुस 4:30-32; लूका 13:18-19) और ख़मीर के दृष्टान्त (मत्ती 13:33; लूका 13:20) परमेश्वर के राज्य की रहस्यपूर्ण प्रगति और अतिसूक्ष्मता के बारे में कुछ प्रगट करता है। हम बारी बारी से प्रत्येक को संक्षेप में देखेंगे।

यीशु ने परमेश्वर के राज्य को राई के दाने के समान बताया, जिसके छोटे प्रारम्भिक प्रारूप की तुलना में इसके प्रभावशाली अन्तिम प्रारूप ने यीशु को परमेश्वर के राज्य के उद्घाटन और परिपूर्णता के मध्य उसकी प्रगति का उचित चित्रण के साथ प्रस्तुत किया। पलिश्ती के सबसे छोटे बीजों में से एक, राई का बीज समय के साथ झाड़-समान पेड़ उपजेगा जो कि दस फीट से अधिक लम्बा हो जायेगा। यह छोटा बीज इतना बड़ा हो जायेगा कि आकाश के पक्षी इसे निवास स्थान के लिए सहायक पाएंगे।

यह वर्णन बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर का स्मरण दिलाता है। उसने एक पेड़ के बारे में स्वप्न देखा जो कि इतना बड़ा हो गया कि आकाश के पक्षी उसमें विश्राम करते थे। फिर भी, पेड़ क्षण भर में ही काट दिया गया था। दानिय्येल की व्याख्या ने यह प्रगट किया कि सभी मनुष्यों के राज्य ढह जाएंहे, यहाँ तक कि पराक्रमी नबूकदनेस्सर का भी (दानिय्येल 4)। परमेश्वर का राज्य भिन्न है। हालाँकि इस राज्य का उद्घाटन प्रभावशाली नहीं था, यह तब तक बढ़ता रहेगा जब तक यह अपने अन्तिम, महिमावान रूप तक न पहुँच जाए, जब तक आकाश के पक्षी इसकी शाखाओं में बसेरा नहीं कर लेते (यहेजकेल 31:6)।

ऐसा न हो कि उसके श्रोता सन्देश से चूक जाएं, यीशु ने परमेश्वर के राज्य के बारे में उसी विचार का यथार्थता चित्रण करने के लिए एक और दृष्टान्त बताया। इस दृष्टान्त में, एक स्त्री पिछले सप्ताह के गुंथे हुए आटे में से ख़मीर तीन पसेरी आटे में मिला देती है। थोड़े सा ख़मीर सारे गुंथे हुए आटे पर प्रभाव डालता है। ख़मीर के समान ही, परमेश्वर का राज्य छोटे से प्रारम्भ होता है, और इसका कार्य तब तक प्रायः छिपा हुआ और अदृश्य रहता है, जब तक कि उसका पूर्ण प्रभाव न हो जाए।   

ये दोनों दृष्टान्त यीशु के प्रथम और द्वितीय आगमन के मध्य परमेश्वर के राज्य के विकास को समझाते हैं। उनमें, यीशु ने दिखाया कि जिस रीति से उसने परमेश्वर के राज्य का आरम्भ किया उस में मसीहाई पदवी और राज्य से सम्बन्धित सामर्थ्य और वैधता के बारे में कोई सन्देह नहीं उत्पन्न होना चाहिए। यह विनम्र उद्घाटन कोई त्रुटि नहीं था—यह परमेश्वर द्वारा नियोजित था। जॉन कैल्विन बताते हैं, “प्रभु अपने शासन को शक्तिहीन और तिरस्कृत आरम्भ के साथ खोलता है, इसी अभिप्राय से, कि उसका सामर्थ्य को उसकी अप्रत्याशित प्रगति द्वारा पूरी रीति से चित्रण किया जा सके।”

जब से यीशु ने इन दृष्टान्तों को अभिव्यक्त किया है, राई के बीज जड़ पकड़ चुका और फल-फूल चुका है। ख़मीरी रोटी घनात्मक रूप से फैल रही है। जो यीशु और उसके अनुयायियों का विरोध करते थे ने स्वर्गारोहण के बाद नवजात कलीसिया को कुचलने का प्रयास किया—पेड़ को काटने के लिए—इससे पहले के वह यरुशलेम से परे निकल जाए। फिर भी, उनके प्रयत्न व्यर्थ थे। वास्तव में, जितना उन्होंने काटा, उतना ही पेड़ बढ़ता गया। स्तिफनुस की शहादत एक चित्रण है, क्योंकि इसने फैलाव को प्रबल किया जो सुसमाचार को यरुशलेम से परे, यहूदिया में, सामरिया में, और पृथ्वी के छोर तक ले गया (प्रेरितों के काम 8:4)। कलीसिया का इतिहास यीशु की प्रतिज्ञा की पूर्ति है कि उसकी कलीसिया पर अधोलोक के फाटक भी प्रबल न होंगे (मत्ती 16:18)।परन्तु जिस राज्य का यीशु ने उद्घाटन किया वह उसकी वापसी की प्रतिक्षा उसके पूर्ण और अन्तिम परिपूर्ति के लिए कर रहा है।  इस अन्तरिम अवधि में, हम रूप को देख कर नहीं, पर विश्वास के साथ चलते हैं (2 कुरिन्थियों 5:7)। हम इस राज्य के नागरिक हैं जो कभी टल नहीं सकता (इब्रानियों 12:28)। जब ख्रीष्ट परमेश्वर के राज्य को पूर्ण करने के लिए फिर से आएगा, कोई भी उसकी महिमा को नकार नहीं पाएगा (मत्ती 25:31; मरकुस 14:62)। वह जिसने देहधारण किया और विनम्र अवस्था में जन्म लिया, वह न्याय और प्रताप में (1 थिस्सलुनीकियों 4:16; प्रकाशितवाक्य 1:7) राज्य को पूर्ण करने के लिए फिर से आएगा। तब, अन्त में, परमेश्वर का डेरा मनुष्य के साथ में होगा (प्रकाशितवाक्य 21:3-4)।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
ऐरन एल. गैरियट्ट
ऐरन एल. गैरियट्ट
रेव. ऐरन एल. गैरियट्ट (@AaronGarriott) टेब्लटॉक पत्रिका के प्रबन्धक सम्पादक हैं, सैन्फर्ड, फ्लॉरिडा में रेफर्मेशन बाइबल कॉलेज में निवासी सहायक प्राध्यापक हैं, तथा प्रेस्बिटेरियन चर्च इन इनडिया में एक शिक्षक प्राटीन हैं।