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मेरे जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा क्या है?

परमेश्वर की अगुवाई के विषय में बाइबल क्या कहती है? यह कहती है कि यदि हम परमेश्वर को स्मरण करके अपने सब कार्य करें तो वह हमारे लिए सीधा मार्ग निकालेगा (नीतिवचन 3:5-6)। हमें अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा को सीखने के लिए पवित्रशास्त्र द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है, और हम अपना ध्यान परमेश्वर की आज्ञप्तिपरक इच्छा (decretive will) पर नहीं परन्तु परमेश्वर की आदेशात्मक इच्छा (preceptive will) पर केंद्रित करके ऐसा करते हैं। यदि आप अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा जानना चाहते हैं, तो बाइबल आपको बताती है: ” परमेश्वर की इच्छा है कि तुम पवित्र बनो” (1 थिस्सलुनीकियों 4:3)। इसलिए जब लोग सोचते हैं कि उन्हें क्लीवलैंड में नौकरी करनी चाहिए या सैन फ्रांसिस्को में, या जेन से विवाह करना चाहिए या मार्था से, तो उन्हें परमेश्वर की आदेशात्मक इच्छा का गहराई से अध्ययन करना चाहिए। उन्हें उन सिद्धान्तों को सीखने के लिए परमेश्वर की व्यवस्था का अध्ययन करना चाहिए, जिनके द्वारा उन्हें दिन-प्रतिदिन अपना जीवन जीना है।

भजनकार लिखता है, “क्या ही धन्य वह मनुष्य है जो दुष्टों की सम्मति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, और न ठट्ठा करनेवालों की बैठक में बैठता है; परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता है, और उसकी व्यवस्था पर दिन रात मनन करता रहता है” (भजन 1:1-2)। भक्तिपूर्ण मनुष्य की प्रसन्नता परमेश्वर की आदेशात्मक इच्छा में होती है, और जो व्यक्ति इस पर ध्यान केंद्रित करता है वह “उस वृक्ष के समान है जो जल-धाराओं के किनारे लगाया गया है और अपनी ऋतू में फलता है” (पद 3)। तथापि, भक्तिहीन मनुष्य ऐसे नहीं होते हैं, परन्तु “भूसी के समान होते हैं जिसे पवन उड़ा ले जाता है” (पद 4)।

यदि आप जानना चाहते हैं कि कौन सा काम-काज करना है, तो आपको सिद्धान्तों में निपुणता प्राप्त करनी होगी। जब आप ऐसा करेंगे, तब आपको पता चलेगा कि यह परमेश्वर की इच्छा है कि आप अपने वरदानों और प्रतिभाओं का गम्भीर विश्लेषण करें। फिर आपको इस बात पर विचार करना होगा कि क्या वह काम-काज आपके उपहारों के अनुरूप है; यदि ऐसा नहीं है तो आपको इसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। उस स्थिति में, परमेश्वर की इच्छा है कि आप एक भिन्न काम-काज की खोज करें। परमेश्वर की इच्छा यह भी है कि आप अपने व्यवसाय – अपनी बुलाहट – को अपने काम-काज के अवसर से मिलान करें , और इसके लिए वीजा बोर्ड (ouija board) का उपयोग करने की तुलना में बहुत अधिक कार्य करने की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ जीवन में सभी विभिन्न वस्तुओं पर परमेश्वर की व्यवस्था को लागू करना है।

जब यह निर्णय लेने की बात आती है कि किससे विवाह करना है, तो आपको विवाह पर परमेश्वर की आशीष के सम्बन्ध में पवित्रशास्त्र में कही गई हर बात को देखना है। ऐसा करने के पश्चात् आपको पता चल सकता है कि ऐसे कई सम्भावित व्यक्ति हैं जो बाइबल की योग्यताओं को पूरा करते हैं। तो आप किससे विवाह करेंगे? इसका उत्तर सरल है: आप जिससे भी विवाह करना चाहें। जब तक जिसे आपने चुना है वह परमेश्वर की आदेशात्मक इच्छा के मापदण्डों के अंतर्गत आता है, आपको जो भी अच्छा लगता है उसके अनुसार कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता है, और आपको यह सोचकर नींद गंवाने की आवश्यकता नहीं है कि क्या आप परमेश्वर की गुप्त या आज्ञप्तिपरक इच्छा के बाहर हैं। सबसे पहले, आप परमेश्वर की आज्ञप्तिपरक इच्छा से बाहर हो ही नहीं सकते हैं। दूसरा, आज के लिए आपके लिए परमेश्वर की गुप्त इच्छा को जानने का एकमात्र उपाय कल तक प्रतीक्षा करना है और कल आपको यह स्पष्ट कर देगा, क्योंकि आप भूतकाल को देख सकते हैं और जान सकते हैं कि बीते हुए समय में जो कुछ भी हुआ वह परमेश्वर की गुप्त इच्छा का ही प्रकटीकरण था। दूसरे शब्दों में, हम केवल घटित होने के पश्चात् ही परमेश्वर की गुप्त इच्छा को जान पाते हैं। हम सामान्य रूप से भविष्य के सन्दर्भ में परमेश्वर की इच्छा को जानना चाहते हैं, जबकि पवित्रशास्त्र में वर्तमान में हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा पर बल दिया गया है, और इसका सम्बन्ध उसकी आज्ञाओं से है।

“गुप्त बातें” परमेश्वर की हैं, हमारी नहीं। “गुप्त बातों” को जानना हमारा कार्य नहीं हैं, क्योंकि उन पर हमारा अधिकार नहीं है; उसका अधिकार है। तथापि, परमेश्वर ने अपने मन की कुछ गुप्त योजनाओं पर से गोपनीयता हटा दी है, और ऐसी बातें हमारी हैं। उसने आवरण हटा दिया है। इसे ही हम प्रकाशन कहते हैं। प्रकाशन उस वस्तु का प्रकटीकरण है जो पहले छिपी हुई थी।

प्रकाशन के माध्यम से जो ज्ञान हमारा है वह वास्तव में परमेश्वर का है, लेकिन परमेश्वर ने इसे हमें दिया है। व्यवस्थाविवरण 29:29 में मूसा यही कह रहा था। गुप्त बातें परमेश्वर की हैं, परन्तु जो कुछ उसने प्रकट किया है वह हमारा है, और न केवल हमारा, परन्तु हमारे बच्चों का भी है। परमेश्वर को यह भाया कि हम पर कुछ बातें प्रकट करे, और हमें उन बातों को अपने बच्चों और अन्य लोगों के साथ साझा करने की वर्णनातीत आशीष प्राप्त है। व्यवस्थाविवरण में जिन मुख्य बातों पर बल दिया गया है, उनमे से एक है: उस ज्ञान को अपने बच्चों तक पहुँचाने की प्राथमिकता। परमेश्वर की प्रकट इच्छा उसकी आदेशात्मक इच्छा में और इसके माध्यम से दी गई है, और यह प्रकाशन इसलिए दिया गया है जिससे कि हम आज्ञाकारी बन सकें।

जैसा कि मैंने पहले कहा, बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं कि वे अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा को कैसे जानें, लेकिन यह दुर्लभ है कि कोई मुझसे यह पूछे कि वह परमेश्वर की व्यवस्था को कैसे जाने। लोग इसलिए नहीं पूछते क्योंकि वे जानते हैं कि परमेश्वर की व्यवस्था को कैसे समझा जाए—वे इसे बाइबल में पाते हैं। वे इसे जानने के लिए परमेश्वर की व्यवस्था का अध्ययन कर सकते हैं। अधिक कठिन प्रश्न यह है कि हम परमेश्वर की व्यवस्था का पालन कैसे करें। कुछ लोग इस विषय में विचार करते हैं हैं, लेकिन बहुत अधिक नहीं। अधिकाँश लोग जो परमेश्वर की इच्छा के विषय में पूछताछ करते हैं, वे भविष्य का ज्ञान खोज रहे हैं, जो बंद है। यदि आप परमेश्वर की इच्छा को इस अर्थ में जानना चाहते हैं कि परमेश्वर क्या अधिकृत करता है, परमेश्वर किस बात से प्रसन्न होता है, और परमेश्वर आपको किस बात के लिए आशीष देगा, तो इसका उत्तर उसकी आदेशात्मक इच्छा, अर्थात व्यवस्था में पाया जाता है, जो स्पष्ट है।

 यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

आर.सी. स्प्रोल

आर.सी. स्प्रोल

डॉ. आर.सी. स्प्रोल लिग्नेएर मिनिस्ट्रीज़ के संस्थापक, सैनफर्ड फ्लॉरिडा में सेंट ऐन्ड्रूज़ चैपल के पहले प्रचार और शिक्षण के सेवक, तथा रेफर्मेशन बाइबल कॉलेज के पहले कुलाधिपति थे। वह सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक थे, जिसमें द होलीनेस ऑफ गॉड भी सम्मिलित है।