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20 मई 2024मुझे भजन-संहिता क्यों प्रिय है?
हाल ही के एक सम्मेलन में मुझसे पूछा गया कि बाइबल की मेरी सबसे प्रिय पुस्तक कौन सी है। मेरी आरम्भिक प्रतिक्रिया यह सोचने की थी कि क्या यह एक बुरा प्रश्न है। क्या हमें परमेश्वर का सम्पूर्ण वचन समान रूप से प्रिय नहीं होना चाहिए? फिर मैंने सोचा कि मुझे सहयोग करना चाहिए, और मैंने स्वयं से पूछा कि मैं सबसे अधिक किस पुस्तक को पढ़ता हूँ और उसका आनन्द लेता हूँ। मैं समझ गया कि इसका उत्तर सरल है। हाल के वर्षों में, वह पुस्तक भजन-संहिता रही है।
जब मैं उच्च विद्यालय में एक कनिष्ठ विद्यार्थी (junior) के रूप में अध्ययन कर रहा था, तब मेरा ह्रदय-परिवर्तन एक ऐसी कलीसिया की सेवकाई के माध्यम से हुआ था जो मुख्य रूप से भजन गाती थी। इसलिए कई वर्षों तक मैंने भजनों में ही जीवन बिताया और उनके विषय में कुछ बातें जान गया था। किन्तु पिछले कुछ वर्षों में, मैंने उन्हें अत्यधिक मनोहर और आकर्षक पाया है। भजनों की कई विशेषताएँ मेरे लिए विशेष रूप से आकर्षक रही हैं। पहली है भाषा की सुन्दरता और विश्वास के महान् सत्यों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति। इन सरल शब्दों पर विचार करें, “यहोवा मेरा चरवाहा है” (भजन 23:1)। उन्होंने दुःख में पड़ी अनेक आत्माओं को कितनी शान्ति दी है। या भजन 103 में परमेश्वर के छुटकारे की प्रतिज्ञाओं के विषय में विचार करें: “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूल; जो तेरे सब अधर्मों को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता; जो तेरे प्राण को गड्डे से उबारता, और तेरे सिर पर करुणा और दया का मुकुट पहनता, जो तेरी लालसाओं को भली वस्तुओं से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब के समान फिर से नई हो जाती है (पद 2-5)।” या परमेश्वर के द्वारा हमारे दुःख के स्मरण की मार्मिक तस्वीर पर विचार करें: “मेरे आँसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले” (भजन 56:8 )।
दूसरा आकर्षण यह जानना है कि जितना अधिक गहरा आप भजन संहिता में उतरेंगे, उतना अधिक लाभ आप पाएँगे। सभी महान् काव्यों के सामान, भजन संहिता भी एक ऐसी खदान के सामान है, जिसमें सदा और अधिक गहरा उतरा जा सकता है और अधिक सोना पाया जा सकता है। हम भजनों को बेहतर ढंग से जानने के लिए जो कुछ भी प्रयास करते हैं, उनका वे भरपूर फल देते हैं।
तीसरा, सभी अवसरों के लिए भजन उपलब्ध हैं। निस्सन्देह, भजन उन सभी अवसरों का स्पष्ट सन्दर्भ नहीं देते हैं जिनके लिए हॉलमार्क (ग्रीटिंग कार्ड की एक कंपनी) कार्ड हैं। किन्तु वे परमेश्वर के लोगों के जीवन के सभी महत्वपूर्ण आत्मिक क्षणों और भावनाओं को चिह्नित करते हैं। जैसा कि जॉन केल्विन ने कहा, “मैं इस पुस्तक को ‘आत्मा के सभी भागों का शरीर-रचना-विज्ञान (Anatomy )’ कहने का अभ्यस्त हूँ, मुझे लगता है कि यह अनुचित नहीं है; क्योंकि ऐसी कोई भावना नहीं है, जिसका कोई व्यक्ति अनुभव करता हो और जो यहाँ प्रतिबिम्बित नहीं की गई हो, जैसा कि एक दर्पण में होता है। भजन हमें सिखाते हैं कि हम अपने जीवन की सभी परिस्थितियों में परमेश्वर के सम्मुख अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें। चौथा, भजन यीशु ख्रीष्ट से भरे हुए हैं। वे न केवल स्पष्ट रूप से ख्रीष्ट के आने की नबूवत करते हैं (उदाहरण के लिए, भजन 2; 22; 110), किन्तु भजनों का सन्देश हमेशा आत्मा को ख्रीष्ट और उसके महान् उद्धार के कार्य की ओर खींचता है। जैसा कि प्राचीन कलीसिया में कहा गया था, “सदा मुँह में एक भजन, सदा ह्रदय में ख्रीष्ट” (सेम्पर इन ओरे साल्मुस, सेम्पर इन कॉर्डे क्रिसटुस )। भजन ख्रीष्ट के साथ हमारी संगति को घनीष्ट करते हैं। मैंने भजनों में जो पाया है, उससे कलीसिया के इतिहास में कई लोग अच्छे से परिचित है। पूरे इतिहास में कई स्थानों पर कई ख्रीष्टियों ने भजन की पुस्तक को बहुमूल्य जाना है। प्राचीन और मध्य काल में भजनों का अध्ययन और गायन बारम्बार किया जाता था, विशेषकर मठवासियों द्वारा। महान् एथनेश्यस (296-373) ने कहा, “मेरा मानना है कि एक व्यक्ति को इन भजनों से अधिक महिमावान कुछ भी नहीं मिल सकता है; क्योंकि वे मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन, उसके मन के स्नेह और उसकी आत्मा के भावों को अपने में समाविष्ट कर लेते हैं। परमेश्वर की स्तुति और महिमा करने के लिए वह हर अवसर के लिए उपयुक्त भजन का चयन कर सकता है, और इस प्रकार उसे पता चलेगा कि वे उसके लिए लिखे गए थे।” धर्म सुधार में कलीसिया में सभी के लिए बाइबल की पुनर्प्राप्ति का अर्थ भजन-संहिता की पुनर्प्राप्ति भी था। लूथर ने एक सन्यासी के रूप में ही सम्पूर्ण भजन संहिता सीख लिया था और वह बाद में भी उससे प्रेम करते रहे। उन्होंने भजन-संहिता को “एक छोटी बाइबल” कहा, “भजन संहिता को एक बहुमूल्य और प्रिय पुस्तक होनी चाहिए, इसके लिए पर्याप्त कारण यह है: यह ख्रीष्ट की मृत्यु और पुनरुत्थान की स्पष्ट रूप से प्रतिज्ञा करती है – और उसके राज्य और समस्त ख्रीष्टीय जगत की अवस्था और प्रकृति को चित्रित करती है —जिससे कि इसे एक छोटी बाइबल कहा जा सके।”
पूरी बाइबल में जो कुछ भी है, उसे इसमें सबसे अधिक सुन्दरता से और सबसे अधिक संक्षेप में समाविष्ट किया गया है।” धर्म सुधारवादियों (The Reformed) ने भजनों को छंदबद्ध (versify) किया और कलीसिया की गीतपुस्तिका के रूप में गाया। वे प्रारम्भिक कैल्विनवादी परमेश्वर की स्तुति करने के लिए उसके शब्दों को अपने होठों पर लाने में सक्षम होने के कारण आनन्दित हुए। जॉन कैल्विन, जिन्होंने गायन के लिए सम्पूर्ण भजन संहिता के छन्दीकरण का पर्यवेक्षण (supervision) किया, ने भजनों के प्रति अपना उत्साह इन शब्दों में व्यक्त किया: “चूँकि परमेश्वर को पुकारना हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रमुख साधनों में से एक है, और (प्रार्थना के) इस अभ्यास में हमारा मार्गदर्शन करने के लिए भजन संहिता से बेहतर और अधिक अचूक निर्देश कहीं और नहीं पाया जा सकता है, परिणामस्वरूप, जिस अनुपात में एक व्यक्ति उन्हें समझने में दक्षता प्राप्त करेगा, उसी अनुपात में वह स्वर्गीय सिद्धान्त के सबसे महत्वपूर्ण भाग का ज्ञान प्राप्त करेगा।”
कैल्विन के अनुयायियों ने इसके महत्व के विषय में उनके दृढ़ विश्वास को साझा किया। उदाहरण के लिए, हुगुएनॉट्स (Huguenots) के नाम से जाने जाने वाले फ्रांसीसी कैल्विनवादियों के अनुभव में हम इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। जैसा कि बर्नार्ड कॉट्रेट ने लिखा, “भजन संहिता फ्रांसीसी धर्म सुधार (Reformation) था।” सोलहवीं शताब्दी के मध्य के उन फ्रांसीसी प्रोटेस्टेन्टों को भजन बहुत प्रिय थे और वे हुतात्माओं (शहीदों) के रूप में मरने के मार्ग पर भी उत्सुकता से उन्हें गाते थे। फ्रांसीसी हुगुएनॉट्स ने भजन संहिता के गीतों के अपने छन्दात्मक संस्करण के द्वारा “कैल्विन की धर्मपरायणता (piety) को काव्यात्मक शक्ति प्रदान की।” सोलहवीं शताब्दी में गायन के लिए भजनों के इन काव्यात्मक अनुवादों ने कलीसिया को भजन की शक्ति और प्रासंगिकता को फिर से देखने में सहायता की।
तथापि, भजन धर्मसुधारवादी ख्रीष्टियों (Reformed Christians) के लिए प्रेरणा और शान्ति देने वाले साधन से कहीं अधिक थे। भजन परमेश्वर के समक्ष अपने आनन्दों और दुखों को परमेश्वर के शब्दों में ही व्यक्त करने के साधन से भी कहीं अधिक थे। भजन संहिता ने उस जीवन की व्याख्या की जो वे उन दुष्टों के सम्बन्ध में जी रहे थे जो उनका विरोध करते थे और परमेश्वर के सम्बन्ध में जी रहे थे, जो उन्हें चला रहा था। परमेश्वर के लोगों के रूप में, वे भजनों में जीवन जी रहे थे।
यह अंश डब्ल्यू रॉबर्ट गॉडफ्रे द्वारा लिखित ‘लर्निंग टू लव द सामज़’ से लिया गया है।
यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

