बाहरी आनन्द की तुलना में वास्तविक आनन्द| लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़
हमारे कार्य में आनन्द
19 जुलाई 2021
समुदाय में आनन्द
26 जुलाई 2021

बाहरी आनन्द की तुलना में वास्तविक आनन्द

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का तीसरा अध्याय है: आनन्द

बैंक का कार्य उबाऊ है। या, कम से कम, अधिकतर लोग यही सोचते हैं—अर्थात, जब तक कि आप बैंक कर्मचारी के पुत्र न हों, जो मैं हूँ। आप देखिए, कभी- कभी मेरे पिता जी अपने साथ कार्य करने के लिए ले आते थे और ऐसी बातों से मुझे व्यस्त रखते थे जो वे सोचते थे एक दस वर्ष का लड़का बैंक में रुचिकर सोचेगा। मैं सदा नकली पैसों के प्रदर्शन को देखता रहता था—एक मध्यम आकार की पेटी जिसमें असली और नकली पैसे को साथ-साथ दिखाया जाता था और यह बताया जाता था कि आप उनमें अन्तर कैसे बता सकते हैं।

वास्तविक और नकली पैसे के बीच अन्तर बताने में सक्षम होना बैंक में एक बच्चे के लिए केवल रुचिकर बात नहीं है; यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है, विशेष रीति से जब वास्तविक आनन्द और झूठा आनन्द के बीच अन्तर बताने की बात आती है। हो सकता है कि आपने धन और आनन्द के बीच के मूल्य के सम्बन्ध को न जोड़ा हो, परन्तु विचार करें कि आनन्द कितना महत्वपूर्ण है। आनन्द हमें बताता है कि हम जीवन में सबसे अधिक किसको महत्व देते हैं; यह हमें लोगों के रूप में परिभाषित करता है। तो, क्या आप झूठे और बाहरी आनन्द का पता लगा सकते हैं? ऐसा करने के लिए, आपको चार प्रकार के आनन्द के बीच अन्तर बताने में सक्षम होना चाहिए— झूठा, अस्थिर, लुप्त होने वाला, और सदा के लिए बने रहने वाला आनन्द।

झूठा आनन्द  सच्चे आनन्द का सबसे प्रबल कूटनीति है। झूठा आनन्द वह आनन्द है जिसे लोग पाप में अनुभव करते हैं, प्रलोभन के कांटे में फंसे हुए चारे के समान। यौन विजय के आनन्द ने दाऊद को बतशेबा के साथ व्यभिचार करने के लिए प्रेरित किया और बात छिपाए रखने के आनन्द ने उसके पति की हत्या करने के लिए प्रेरित किया (1 शमूएल 11)। यह झूठा आनन्द और इसका निरर्थक आकर्षण पाप को सम्भव और दोहराने योग्य बनाता है। झूठा आनन्द कोई वास्तविक आनन्द नहीं है। यह केवल पापपूर्ण, वासनापूर्ण इच्छा है जो आनन्द के रूप में आडम्बर करता है, जो आपकी आत्मा को जहर देते हुए क्षणिक आनन्द देता है। इसलिए, झूठे आनन्द की खोज करने के लिए हमारा पहला नियम यह है: सच्चा आनन्द केवल परमेश्वर के नियम की सीमा के अन्तर्गत ही पाया जा सकता है।

 दूसरे प्रकार का आनन्द अस्थिर आनन्द  है। अस्थिर आनन्द परिस्थितियों पर निर्भर खुशी है। जब जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तो सुख बहुत अधिक होता है, और परमेश्वर की निकटता का अनुमान लगाया जाता है। जब जीवन में निराशा, अवसाद, और अन्धेरा हो, अस्थिर आनन्द कहीं नहीं मिलता है, और हम यह अनुभव करते हैं कि परमेश्वर हमसे बहुत दूर है। जबकि वास्तविक आनन्द सुखद और भयंकर दोनों परिस्थितियों में रहता है, परिस्थितियां वास्तविक आनन्द को भी छिपा सकती हैं, विशेष रीति से दुख में। इसलिए, अस्थिर आनन्द बस यही है, अस्थिर और केवल अच्छी परिस्थिति में दिखाई देना वाला आनन्द। और यह हमारा दूसरा नियम है: परिस्थितियां वास्तविक आनन्द को न तो उत्पन्न कर सकती हैं और न ही घटा सकती हैं।

तीसरे प्रकार का आनन्द लुप्त होने वाला आनन्द  है, एक प्रकार का आनन्द जो सभी मनुष्यों के लिए परमेश्वर के सामान्य अनुग्रह में निहित है। यदि आप एक मनुष्य हैं, आपके आत्मिक स्थिति को ध्यान दिए बिना, परमेश्वर ने आपको आशीष दिया है (मत्ती 5:45)। और वे आशीषें परमेश्वर के अनुग्रहकारी आशीष के प्रतिउत्तर के रूप में आनन्द का आह्वान करती हैं। इन आशीषों में प्रतिभा, परिवार, सम्पत्ति, स्वास्थ्य, उपलब्धियां, सूर्योदय की सुन्दरता, और यहाँ तक कि कठिन परीक्षाओं के द्वारा सीखे गए पाठ जैसी कई बातें सम्मिलित हैं। यह एक सच्चा आनन्द है, जो सभी परिस्थितियों में बना रहता है, सभी लोगों के द्वारा अनुभव किया जाता है; फिर भी, यह एक लुप्त होने वाला आनन्द है। यह आनन्द मिटता जा रहा है क्योंकि यह संसार और इसके द्वारा दी जाने वाली सभी अच्छाइयाँ सब कुछ नहीं है। यदि आप संसार को प्राप्त करते हैं और आपके पास परमेश्वर नहीं है, तो आपके पास कुछ भी नहीं है। और इसलिए हमारे पास हमारा तीसरा नियम है: इस संसार द्वारा दिया जाने वाला सबसे उत्तम वस्तु लुप्त होने वाला आनन्द है।

चौथा और सबसे वास्तविक प्रकार का आनन्द अनन्त आनन्द  है, जिसका नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह एक ऐसा आनन्द है जो अनन्त परमेश्वर की ओर से आता है, और अनन्त परमेश्वर की ओर पुनः निर्देशित किया जाता है, एक ऐसा आनन्द जो मसीहियों का विशेष अधिकार है। अनन्त आनन्द परमेश्वर का वह आनन्द है जो वह अपनी सृष्टि में, और अपने उद्धार के कार्य में लेता है। केवल यीशु में विश्वास के द्वारा ही आप, एक मसीही के रूप में, इस आनन्द में भाग लेने और उसका अनुभव कर सकते हैं। जब आप परमेश्वर की महिमा करते हैं, तो आप उसके उस आनन्द में भाग लेते हैं जो जिसका वह स्वयं में आनन्द उठाता है। जब आप सृष्टि को देखते हैं, तो आप इसे न केवल सुन्दर देखते हैं, परन्तु इसके सृष्टिकर्ता के रूप में परमेश्वर की सुन्दरता को प्रकट करते हुए देखते हैं। जब आप अपने उद्धार पर मनन करते हैं, तो आप अपने प्रति परमेश्वर के चुनाव के अनुग्रह में आनन्दित होते हैं, जिसके आप अयोग्य हैं और जो धनी है। यह आनन्द दुख और समृद्धि में मसीहियों का है, इस जीवन में और अगले जीवन में, हमारे प्रभु यीशु ख्रीष्ट के द्वारा। और यह हमारा अन्तिम नियम है: वास्तविक और स्थायी आनन्द केवल परमेश्वर के साथ ख्रीष्ट में पाया जाता है।

अब आपने झूठा, बाहरी आनन्द और वास्तविक आनन्द को साथ-साथ देखा है। जब आप अपने जीवन का अवलोकन करते है, तो आपने अपनी सेवा के लिए चार नियम प्राप्त किए हैं। तुच्छ, झूठे आनन्द में सन्तुष्ट न हों। वास्तविक और दृढ़ आनन्द को थाम ने के लिए आगे बढ़ते जाएं। वेस्टमिंस्टर लघु प्रश्नत्तरी सही है जब यह कहता है कि मसीहियों का मुख्य लक्ष्य परमेश्वर की महिमा करना और सर्वदा के लिए उसमें आनन्दित होना है, क्योंकि, अन्त में, आनन्द ही उतना अच्छा है जितना कि उसका लक्ष्य।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
जो हॉलैण्ड
जो हॉलैण्ड
रेव्ह. जो हॉलैण्ड प्रेस्बिटेरियन चर्च इन अमेरिका में एक शिक्षक प्राचीन हैं।