आत्मा का फल नौ सद्गुणों की एक सूची है, जो प्रेरित पौलुस द्वारा गलातियों 5:22–23 में दी गई हैं। यह सूची पापपूर्ण दुर्गुणों ("शरीर के कार्यों") की एक लम्बी सूची के प्रत्युत्तर में आती है जो मानव अस्तित्व की निराशाजनक और क्रूर चित्र को दिखाते हैं - जैसे क्रोध, मतभेद और ईर्ष्या (गलातियों 5:19-21)। इसके (विपरीत) में, “आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दयालुता, भलाई, विश्वस्तता, नम्रता व संंयम हैं।” इस संक्षिप्त सूची का सीधा प्रभाव इस बात पर पड़ता है कि हम कौन हैं और मसीही होने के नाते हम क्या करते हैं।