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केवल ख्रीष्ट में आनन्द

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पहला अध्याय है: आनन्द

मसीहियत आनन्द का धर्म है। वास्तविक आनन्द परमेश्वर से आता है, जिसने हम पर चढ़ाई किया है, हम पर विजय प्राप्त की, और जिसने हमें अनन्त मृत्यु और दुख से छुड़ाया है—जिसने हमें आशा और आनन्द दिया है क्योंकि उस ने पवित्र आत्मा के द्वारा, जिसे उसने हमें दिया है, हमारे हृदयों में अपना प्रेम उण्डेला है (रोमियों 5:5)। आनन्द हमारी ओर से नहीं, परन्तु परमेश्वर की ओर से आता है। जब हम स्वयं के भीतर देखते हैं, तो हम केवल दुखी होते हैं। हमें आनन्द तभी मिलता है जब हम स्वयं से बाहर ख्रीष्ट की ओर देखते हैं। ख्रीष्ट के बिना, आनन्द पाना न केवल कठिन है, परन्तु असम्भव भी है। संसार आनन्द की खोज करता है, परन्तु सभी अनुचित स्थानों पर। हालाँकि, हमारा आनन्द आता है क्योंकि ख्रीष्ट ने हमें ढूंढ़ा, हमें पाया, और हमें बनाए रखा है। हम बिना ख्रीष्ट के आनन्द प्राप्त नहीं कर सकते, क्योंकि उसका अस्तित्व नहीं है। आनन्द कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे हम स्वयं बना सकें।

आनन्द उदासी की अनुपस्थिति नहीं है—यह पवित्र आत्मा की उपस्थिति है। और यद्यपि पवित्र आत्मा हमारे भीतर आनन्द उत्पन्न करता है, वह प्रायः हमें नम्र करने के द्वारा ऐसा करता है ताकि हम अपनी आँखे स्वयं से हटाएं और अपनी आंखे ख्रीष्ट पर लगांए। वास्तविक आनन्द वास्तविक दुख के मध्य भी होती है, और वास्तविक आनन्द का अर्थ सर्वदा यह नहीं रहता है कि हमारे मुख पर मुस्कुराहट रहे। इसका कभी-कभी यह अर्थ होता है कि हम पश्चात्ताप के आँसुओं के साथ अपने घुटनों पर हों। चार्ल्स स्पर्जन ने स्वीकार किया, “जब मैं क्रूस के नीचे पाप के लिए रो रहा हूँ मुझे नहीं पता कि मैं कब उससे अधिक आनन्दित होता हूँ।” आनन्द पश्चाताप और क्षमा में और प्रतिदिन ख्रीष्ट की ओर देखने और उसकी महिमा के लिए जीवन जीने से आता है, न कि स्वयं को देखने और अपनी महिमा के लिए जीने से। परन्तु यदि हम कल की लज्जा और आने वाले कल की चिन्ताओं को सहकर प्रतिदिन जीते हैं, तो हम कभी भी आज के आनन्द का अनुभव नहीं कर पाएंगे। तो आइए हम सदैव उस आनन्द की खोज में क्रूस की ओर दौड़ें जो केवल ख्रीष्ट दे सकता है, क्योंकि ख्रीष्ट के बिना आनन्द खोजने का प्रयास करना सूर्य के बिना दिन खोजने का प्रयास करना जैसा है। 

ख्रीष्ट दुखी पुरुष था और पीड़ा से उसकी जान पहचान थी ताकि हम अभी और सर्वदा के लिए आनन्द की परिपूर्णता प्राप्त कर सकें। यही कारण है कि वेस्टमिंस्टर लघु प्रश्नोत्तरी (Westminster Shorter Catechism) का पहला उत्तर हमें सिखाता है कि “मनुष्य का मुख्य लक्ष्य परमेश्वर की महिमा करना और सर्वदा उसका आनन्द लेना है।” सी.एस. लूईस ने उचित ही कहा है कि “आनन्द स्वर्ग के लिए बहुत गम्भीर बात है।” परन्तु वास्तविक आनन्द जो परमेश्वर का आनन्द लेने से आता है, वह कुछ ऐसा नहीं है जिसे हम केवल स्वर्ग में अनुभव करेंगे। इसे हम अभी अनुभव कर रहे हैं। क्योंकि इस जीवन में सबसे बड़ा आनन्द यह जानना है कि हमारा सबसे बड़ा आनन्द इस जीवन में नहीं परन्तु आने वाले जीवन में है। हम प्रतिदिन जीते हैं भविष्य की आशा के प्रकाश में, जब ख्रीष्ट “उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; फिर न कोई मृत्यु रहेगी न कोई शोक, न विलाप, और न पीड़ा” (प्रकाशितवाक्य 21)। और जब हम ख्रीष्ट को देखेंगे, तो वह हमारी आँखों से हर आँसू सुखा देगा—न केवल हमारे दुख के आँसू, परन्तु हमारे खुशी के आँसू भी। अन्यथा, हम उसे कभी नहीं देख पाएंगे।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
बर्क पार्सन्स
बर्क पार्सन्स
डॉ. बर्क पार्सन्स टेबलटॉक पत्रिका के सम्पादक हैं और सैनफोर्ड फ्ला. में सेंट ऐंड्रूज़ चैपल के वरिष्ठ पास्टर के रूप में सेवा करते हैं। वेअश्योर्ड बाइ गॉड : लिविंग इन द फुलनेस ऑफ गॉड्स ग्रेस के सम्पादक हैं। वे ट्विटर पर हैं @BurkParsons.