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हमारा सर्व-आधिकारिक सिर

“कलीसिया का सिर” की उपाधि का उपयोग ख्रीष्ट को किसी व्यवसाय या संगठन के प्रमुख के रूप में प्रस्तुत करने के लिए नहीं किया जाता है। कुलुस्सियों 1:18 में, पौलुस ख्रीष्ट को “देह, अर्थात् कलीसिया का सिर” के रूप में अलग करता है। दूसरे शब्दों में, जीवित ख्रीष्ट एक जीवित देह—अर्थात् अपनी दुल्हन—का सिर है। कलीसिया ख्रीष्ट से अपने जीवन को प्राप्त करती है और ख्रीष्ट से पृथक कलीसिया के पास कोई जीवन नहीं है—उनका एक दूसरे के साथ मिलन हुआ है। यह मिलन ख्रीष्ट को सिर के रूप में तथा कलीसिया को उसकी देह के रूप में परिभाषित करता है। जिस प्रकार से वायु-प्रवाहक (ventilator) फेफड़ों को ऑक्सिजन से भरता है, ख्रीष्ट निरन्तर कलीसिया के फेफड़ों को भरता है, उसे आत्मिक जीवन, उपहार, और पृथ्वी पर अपने कार्य को पूरा करने के लिए सामर्थ्य प्रदान करता है। चार्ल्स स्पर्जन ने कहा:

समय अलगाव नहीं लाता है। कलीसिया सर्वदा से एक ही है—प्रेरितों की एक ही कलीसिया, धर्मसुधारकों की एक ही कलीसिया, पहली शताब्दी की एक ही कलीसिया, अन्तिम दिनों की एक ही कलीसिया, और यीशु ख्रीष्ट इस एक ही कलीसिया का एकमात्र सिर है।

कलीसिया के सिर के रूप में ख्रीष्ट के इस विवरण को पौलुस इफिसियों 5 में पति और पत्नी के सम्बन्ध के सन्दर्भ में स्पष्टता से चित्रित करता है। 23 पद में पौलुस ख्रीष्ट के सिर होने को परिवार में पति के सिर होने के रूप में समझाता है। जो पत्नी अधीन होने के अपने आत्मिक उत्तरदायित्व को पूरा नहीं करती है, वह पारिवारिक एकता में दुष्क्रिया का कारण बनती है। जो पत्नी प्रेमपूर्वक अपने पति के दिशा-निर्देश के प्रति प्रतिक्रिया करती है, वह अपने परिवार, अपने पति, और सबसे महत्वपूर्ण अपने प्रभु के लिए आदर का कारण है। वह संसार को साक्षी देती है कि कलीसिया को कैसे उचित रीति से ख्रीष्ट के प्रति अधीनता, आदर, और सेवा के साथ प्रतिक्रिया करना चाहिए।

ख्रीष्ट, ईश्वरभक्त अगुवों के द्वारा कलीसिया की अगुवाई करता है (इब्रानियों 13:7, 17)। उप-चरवाहे, और डीकनगण कलीसिया पर ख्रीष्ट के अधिकार के प्रतिनिधि हैं। पौलुस इस रीति से इन चरवाहों के उद्देश्य को सारांशित करता है: “कि पवित्र लोग सेवा-कार्य के योग्य बनें और ख्रीष्ट की देह तब तक उन्नति करे” (इफिसियों 4:12)। कलीसिया के अगुवों के पास जो भी अधिकार है वह ख्रीष्ट द्वारा दिया गया अधिकार है। यह सर्वदा ख्रीष्ट है, और केवल ख्रीष्ट ही है जो अपनी कलीसिया पर अधिकार के साथ शासन करता है। ख्रीष्ट वचन और आत्मा के द्वारा भी कलीसिया की अगुवाई करता है। जिन लोगों को कलीसिया पर अधिकार दिया गया है, उनका एकमात्र उत्तरदायित्व है कि वे लिखित वचन में ख्रीष्ट के प्रकट निर्देशों की घोषणा करें और उसे लागू करें। पास्टर-चरवाहे का प्राथमिक कार्य है परमेश्वर के वचन के पौष्टिक भोजन को परमेश्वर के झुण्ड को खिलाना (2 थीमुथियुस 3:16-17; 1 पतरस 2:2-3)। शिक्षा देने के द्वारा और प्रचार करने के द्वारा पवित्र आत्मा लोगों को ख्रीष्ट की ओर खींचता है और परमेश्वर के परिवार का पालन-पोषण करता है।

ख्रीष्ट का सिर होना भी “सब वस्तुओं” पर है (इफिसियों 1:22)। केवल ख्रीष्ट ही कलीसिया को हमारे शत्रु शैतान से, हमारे पतित शरीर के प्रलोभनों से, और संसार के सभी झूठ से बचा सकता है। केवल ख्रीष्ट ही अपनी इस प्रतिज्ञा को पूरी कर सकता है कि अधोलोक के फाटक कलीसिया पर प्रबल नहीं हो सकते हैं। केवल ख्रीष्ट ही अपनी भेड़ों को एकत्रित करके अपनी कलीसिया को बढ़ा सकता है। केवल ख्रीष्ट ही आधिकारिक रीति से अपनी दुल्हन की अगुवाई कर सकता है जब तक कि वह सदा के लिए उसके साथ घर न आ जाए।

यह लेख मूलतः लिग्निएर मिनिस्ट्रीज़ ब्लॉग में प्रकाशित किया गया।

डस्टिन डब्ल्यू. बेन्ज
डस्टिन डब्ल्यू. बेन्ज
डॉ. डस्टिन डब्ल्यू. बेन्ज लुईविल, केन्टकी के द सदर्न बैप्टिस्ट थियोलॉजिकल सेमिनरी में बाइबलीय आत्मिकता और ऐतिहासिक ईश्वरविज्ञान के सहायक प्राध्यापक हैं। वे कई पुस्तकों के लेखक हैं, जिनमें द अमेरिकन प्युरिटन्स, स्वीट्ली सेट ऑन गॉड, और द लवलिएस्ट प्लेस सम्मिलित हैं।