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नियंत्रण से बाहर और नियंत्रण में

सम्पादक की टिप्पणी: यह टेबलटॉक पत्रिका श्रंखला का पहला अध्याय है: सिद्धतावाद एवं नियंत्रण

कभी-कभी, ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पूरा संसार पागल हो गया है और नियंत्रण से बाहर हो रहा है। इन सभी संघर्ष और भ्रम के साथ, हम स्वाभाविक रीति से अपने बच्चों और हमारे बच्चों के बच्चों के लिए एक गम्भीर और वास्तविक चिन्ता रखते हैं क्योंकि वे एक ऐसे संसार का सामना करते हैं जो अराजकता और शत्रुता में बढ़ रहा है। परन्तु जैसा कि इतिहास दिखाता है, यही विचार हमारे पिता का और हमारे पिता के पिता का रहा है, — पतन के समय से।

दूसरी ओर, संसार यह प्रस्तुत करना चाहता है कि सब कुछ ठीक होने जा रहा है— कि सब कुछ नियंत्रण में है, और विश्व शान्ति बस निकट ही है यदि हम सब हार मान लें, और वह सब कुछ छोड़ दें जो हम विश्वास करते हैं, और एक साथ हो जाएं। वास्तविकता तो यह है कि सब कुछ ठीक होने नहीं जा रहा है; सब कुछ सिद्ध होने जा रहा है। वास्तव में सब कुछ नियंत्रण में है, और विश्व शान्ति तब आएगी जब शान्ति का राजकुमार लौटेगा। उस दिन तक—और हम प्रार्थना करते हैं कि यह शीघ्र हो—हम इस संसार की अव्यवस्था, संघर्ष और भ्रम के विरुद्ध संघर्ष करते हैं, इस सत्य में विश्राम करते हुए कि परमेश्वर सम्प्रभु है और कि उसने सम्पूर्ण संसार को अपने हाथों में लिया है।

समस्या केवल इस संसार में नहीं है, परन्तु हमारे हृदयों में है। जिस प्रकार संसार यह दिखाना चाहता है कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है, वैसे ही हम न केवल यह दिखाना चाहते हैं कि हमारे हृदय और हमारे घर में सब कुछ हमारे सिद्ध नियंत्रण में है, परन्तु हम वास्तव में सम्पूर्ण नियंत्रण रखना चाहते हैं मानों कि हम सब कुछ पर नियंत्रण करते हैं। हम चाहते हैं कि हर कोई हमें प्रिय जाने, हमारा आदर करे, और ठीक वैसा ही बनना चाहते हैं जैसा हम चाहते हैं कि वे बनें। इसके अतिरिक्त, हम चाहते हैं कि संसार हम से प्रभावित हो, और कभी-कभी यह भी चाहते हैं कि हमारे मित्र हम से थोड़ा ईर्ष्या करें जब वे देखते हैं कि हमारे पास सब कुछ पूरी रीति से नियंत्रण में है।

जीवन सर्वदा अच्छा नहीं होता, परन्तु परमेश्वर भला है, और वह नियंत्रण में है। एक रीति से वह हमें दिखाता है कि वह नियंत्रण में है, वह है हमें यह दिखाने के द्वारा कि हम नहीं हैं। वह स्वर्ग के इस ओर एक सिद्ध जीवन के हमारे भ्रान्ति को टुकड़े-टुकड़े कर देता है और हमें परीक्षाओं, बड़े संकट, मृत्यु और बीमारी के द्वारा अपने घुटनों पर ले आता है। हमारा प्रेमी पिता प्रायः हमारे जीवन में परीक्षा लाता है, इसलिए नहीं कि हम उस परीक्षा से भाग जाएं, परन्तु इसलिए ताकि हम उसकी ओर भागे जो हम पर परीक्षा लाता है। क्योंकि हम सर्वदा उसकी ओर नहीं दौड़ते हैं जब हमें लगता है कि हमारे पास सब कुछ नियंत्रण में है। इसके अतिरिक्त, जब हम विचार करते हैं कि हमारे नियंत्रण में सब कुछ है, तो हम उस रीति से प्रार्थना नहीं करते जैसा हमें करना चाहिए। प्रार्थना हमारे जीवन पर हमारे कथित नियंत्रण का आत्मसमर्पण है उसके प्रति जो उन पर नियंत्रण रखता है और हम से अधिक उनकी चिन्ता करता है। और इसलिए, हम से कहा गया है कि हम अपनी समस्त चिन्ता प्रभु पर डाल दें— केवल उन बातों को नहीं जो हमें लगता है कि हमारे नियंत्रण में नहीं हैं — विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर अपनी दृष्टि लगाएं रखते हुए।

यह लेख मूलतः टेबलटॉक पत्रिका में प्रकाशित किया गया।
बर्क पार्सन्स
बर्क पार्सन्स
डॉ. बर्क पार्सन्स टेबलटॉक पत्रिका के सम्पादक हैं और सैनफोर्ड फ्ला. में सेंट ऐंड्रूज़ चैपल के वरिष्ठ पास्टर के रूप में सेवा करते हैं। वेअश्योर्ड बाइ गॉड : लिविंग इन द फुलनेस ऑफ गॉड्स ग्रेस के सम्पादक हैं। वे ट्विटर पर हैं @BurkParsons.