2 फ़रवरी 2023

चुनाव-समर्थक: इसका अर्थ क्या है?

चुनाव-समर्थक विचारधारा (pro-choice - इस बात के लिए समर्थन देने वाली विचारधारा कि प्रत्येक स्त्री के पास चुनाव करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिए कि वह किसी भी कारण से जब चाहे तब गर्भपात करवा सकती है) का सारतत्त्व क्या है?
31 जनवरी 2023

यीशु ख्रीष्ट: परमेश्वर का मेमना

परमेश्वर का मेमना एक ऐसा विचार है जो सम्पूर्ण छुटकारे के इतिहास में पाया जाता है। इसको उत्पत्ति 22 में देखा जा सकता है, जब परमेश्वर ने अब्राहम से कहा कि मोरिय्याह पर्वत पर जाकर अपने पुत्र इसहाक को बलिदान के रूप में अर्पित करे।
26 जनवरी 2023

जब हम “मानव जीवन की बहुमूल्यता” की बात करते हैं तो हमारा क्या आशय है?

बाइबलीय भाषा में, मानव जीवन की बहुमूल्यता (sanctity of human life) का आधार और जड़ सृष्टि में है। मानवजाति को एक दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जाता है, वरन् वह तो अनन्त परमेश्वर द्वारा सावधानी से निर्मित सृष्टि का प्रतिफल है।
24 जनवरी 2023

प्रार्थना का स्थान

मसीही जीवन का लक्ष्य क्या है? उसका लक्ष्य ईश्वरभक्ति है, जो मसीह के प्रति आज्ञापालन से उत्पन्न होती है। आज्ञाकारिता मसीही अनुभव के धन के कोष को खोल देती है।
19 जनवरी 2023

व्यवस्थावाद के 3 प्रकार

क्या आप पर, एक मसीही के रूप में, कभी व्यवस्थावाद का आरोप लगाया गया है? वह शब्द प्रायः मसीही समाज में त्रुटिपूर्वक रीति से उपयोग किया जाता है।
17 जनवरी 2023

पापनिष्कृति और कोपसन्तुष्टि के क्या अर्थ हैं

जब हम प्रायश्चित्त के प्रतिस्थानिक आयाम की बात करते हैं, तो दो बड़े तकनीकी शब्द बार-बार आते हैं: पापनिष्कृति और कोपसन्तुष्टि।
15 दिसम्बर 2022

क्या धर्म सुधार समाप्त हो चुका है?

इस विषय पर उन लोगों के द्वारा कई अवलोकनों को प्रस्तुत किया गया है जिन्हें मैं “पहले के सुसमाचारवादी” (erstwhile evangelicals) कहूँगा। उनमें से एक ने लिखा है, “लूथर सोलहवीं शताब्दी में सही थे, परन्तु धर्मीकरण का प्रश्न अब कोई समस्या नहीं है”।
16 अगस्त 2022

पवित्रशास्त्र को जानना

प्रायः यह आरोप लगाया जाता है कि बाइबल पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि लोग इसके द्वारा जो कुछ भी कहना चाहते हैं कह सकते हैं।
12 जुलाई 2022

मत्ती की साक्षी

बाइबलीय अध्ययन के इतिहास में, हमने पिछली दो शताब्दियों में तथाकथित “उच्चतर आलोचना” (higher criticism) का उदय देखा है। अत्याधिक उच्चतर आलोचना बाइबलीय स्थलों की विश्वसनीयता के सन्दर्भ में सन्देहवाद के द्वारा अधिक भड़काई जाती है।