21 जून 2021
“परमेश्वर प्रेम है” (1 यूहन्ना 4:8)। वे तीन शब्द इससे अधिक उत्साह से भरे नहीं हो सकते हैं। वे सजीव, मोहक लगते हैं, और एक अंगीठी के समान ऊष्मोत्पादग हैं। पर “परमेश्वर त्रिएकता है”? नहीं, वही प्रभाव नहीं है; वह केवल स्नेहहीन और उबाऊ लगता है।








