हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।
एक स्थानीय कलीसिया के पास्टर के रूप में, उन वर्षों में मैं अनेक लोगों से मिल चुका हूँ जो कलीसिया में जाते हुए बड़े नहीं हुए और उन्होंने कभी भी पवित्रशास्त्र या पवित्रशास्त्र के ईश्वरविज्ञान का अध्ययन नहीं किया।
“परमेश्वर प्रेम है” (1 यूहन्ना 4:8)। वे तीन शब्द इससे अधिक उत्साह से भरे नहीं हो सकते हैं। वे सजीव, मोहक लगते हैं, और एक अंगीठी के समान ऊष्मोत्पादग हैं। पर “परमेश्वर त्रिएकता है”? नहीं, वही प्रभाव नहीं है; वह केवल स्नेहहीन और उबाऊ लगता है।
पवित्र आत्मा अविभाज्य त्रिएकता में तीन हायपोस्टैसिस (व्यक्तियों) में से एक के रूप में उपस्तित्व रखता है। वह सम्पूर्णता से और सुविस्तृत रूप से परमेश्वर है, पिता और पुत्र के साथ एक अस्तित्व में, और सामर्थ्य और महिमा में एक होते हुए। परमेश्वर जो भी करता है, आत्मा करता है, क्योंकि परमेश्वर के सब कार्यों में तीनों व्यक्ति अभिन्न रीति से कार्य करते हैं, चाहे सृष्टि में, दिव्यसंरक्षण में, या उद्धार में।
मुझे अपनी व्याकुलता स्मरण है जब मैंने पहली बार पुत्र की सनातन उत्पत्ति के सिद्धान्त (अर्थात, कि वह सनातन से पिता से उत्पन्न है) का सामना किया। मैं लूइस बर्खोफ की प्रतिष्ठित पुस्तक सिस्टमैटिक थियोलॉजी (विधिवत ईश्वरविज्ञान ) पढ़ने के द्वारा सेमिनरी के लिए तैयारी कर रहा था, और मुझे यह विषय अत्यधिक काल्पनिक लगा।
यदि पुराने नियम में इस्राएल की पहचान के लिए एक विश्वास केन्द्रीय था, वह यह है: परमेश्वर एक है (व्यवस्थाविवरण 6:4)। इस्राएल के आसपास के देशों से विपरीत, ऐसे देश जो अनेक ईश्वरों की आराधना करते थे, इस्राएल एक ऐसे लोग के रूप में अलग किया गया था जो केवल एक परमेश्वर की आराधना करते थे। उनको एकेश्वरवादी होना था।
क्या त्रिएकता का सिद्धान्त बाइबलीय है? यह निर्भर करता है कि जब आप “बाइबलीय” कहते हैं, तो आप का अर्थ क्या है। क्या बाइबल में कहीं भी नीकया के विश्वास वचन के जैसा कुछ है? नहीं।
यह बढ़ते हुए प्रचलित हो रहा है कि लोग अपने संस्करण के सत्य के सन्दर्भ में बात करते हैं। वे “मेरा सत्य” और “आपका सत्य” जैसे वाक्यांशों को उपयोग करते हैं, मानो कि सत्य के अलग-अलग संस्करण हैं। मैंने लोगों को “मेरे सत्य” की बात करते हुए सुना है विभिन्न विषयों के सन्दर्भ में, जिनमें इतिहास, नैतिकता, विज्ञान, और धर्म सम्मिलित हैं।
मैं प्रायः अपने कलीसिया के बच्चों से कहता हूँ— नर्सरी से लेकर कॉलेज के विद्यार्थियों तक—कि वे सोचते हैं कि वे सदा के लिए जीवित रहेंगे, परन्तु, मैं विश्वासयोग्यता से जोड़ता हूँ, “ऐसा नहीं होगा!” वास्तव में, मैं कहता हूँ, आप मरने जा रहे हैं, और सम्भवतः मरने से पहले आप शारीरिक रीति से कष्ट का सामना करेंगे।
अच्छी रीति से पूरा करना अभी आरम्भ होता है। यह सम्भवतः वृद्धावस्था को स्वीकार करने के लिए यह एक युगों का संघर्ष है, पर युवा ख्रीष्टियों को वृद्ध सन्तों के उदाहरणों की आवश्यकता है जिन्होंने अपनी उम्र को गले लगा लिया है और जो अपने बाद के वर्षों में आत्मिक फल उत्पन्न कर रहे हैं।
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