लिग्निएर का ब्लॉग

हम डॉ. आर. सी. स्प्रोल का शिक्षण संघ हैं। हम इसलिए अस्तित्व में हैं ताकि हम जितने अधिक लोगों तक सम्भव हो परमेश्वर की पवित्रता को उसकी सम्पूर्णता में घोषित करें, सिखाएं और रक्षा करें। हमारा कार्य, उत्साह, और उद्देश्य है कि हम लोगों को परमेश्वर के ज्ञान और उसकी पवित्रता में बढ़ने में सहायता करें।

 
29 अगस्त 2023

शरीर और प्राण के सम्मिश्रण के रूप में मनुष्य

कुछ अपवादों को छोड़कर, मसीही कलीसिया ने पुष्टि की है कि मानव स्वभाव शरीर और प्राण का संयोजन है।
24 अगस्त 2023

परमेश्वर के स्वरूप में मनुष्य

परमेश्वर की सृष्टि का सबसे उत्तम भाग अधिक समय के लिए गुप्त नहीं रखा गया है। आखिरकार, वह बाइबल के प्रथम अध्याय में पाया जाता है।
22 अगस्त 2023

सिमुल इयुस्टिस एक पेक्केटोर [अर्थात् एक ही समय में धर्मी और पापी]

एक पत्रकार की कहानी सुनाई जाती है जिसने कई लेखकों और विचारकों से यह पूछने के लिए लिखा: “संसार की समस्या क्या है?” ऐसा कहा जाता है कि जी. के. चेस्टरसन ने उत्तर दिया, “मैं हूँ।”
17 अगस्त 2023

वीया, वेरिटास, वीटा

यूहन्ना के सुसमाचार का सबसे अधिक सुना जाने वाला पद क्या है? सम्भवतः यूहन्ना 3:16 तुरन्त ध्यान में आता है: “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया . . .।”
15 अगस्त 2023

असहमति के मध्य में भी एकता को बनाए रखना

संसार पर पाप के प्रभाव की तुलना एक बम विस्फोट से की जा सकती है। जब बम का विस्फोट किया जाता है, तो बम छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है जो केन्द्र से आरम्भ होकर सभी दिशाओं में फैल जाता है, और सर्वत्र क्षति पहुँचाता है। ऐसा तब से हुआ है जब से आदम ने निषिद्ध फल को खाया है।
10 अगस्त 2023

क्या मसीही लोग सम्पूर्णता से भ्रष्ट हैं?

जॉन न्यूटन ने एक बार पाप के प्रति विश्वासी के अनुभव को प्रसिद्ध रीति से सारांशित किया:
8 अगस्त 2023

चरवाही का कार्य त्रिएकतावादी का कार्य है

जब कलीसिया की चरवाही करने की बात आती है, तो एल्डरों के लिए यह समझना अच्छा है कि उनकी बुलाहट एक व्यावहारिक, त्रिएकतावादी (Trinitarian) कार्य है।
3 अगस्त 2023

एक प्रतिकूल जगत में यीशु को देखना

अपने हृदय-परिवर्तन से पूर्व पौलुस एक कट्टर मसीही-विरोधी के समान था; वह मसीहियत से घृणा करता था और उसको जड़ से उखाड़ने के लिए हर सम्भव प्रयास करता था।
1 अगस्त 2023

हमारा सर्व-महिमामय मसीहा

ख्रीष्ट की महिमा पर प्रायः तब अधिक ध्यान दिया जाता है जब हम स्वयं को अन्धकार की तराइयों में पाते हैं। यीशु के शिष्यों ने अपने जीवन में इस वास्तविकता को अनुभव किया क्योंकि जब यीशु ने अपने क्रूसीकरण की भविष्यद्वाणी की (मरकुस 8:31) तो उनकी जीवन भर की मसीहाई अपेक्षाएँ नष्ट हो गई थीं।